भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 553, कुल 800 में से

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पृष्ठ 553

अथ प्रत्यन्तर्दशाऽध्यायः । ५५३ राहु की दशा में राहु के अन्तर में बंधन, अनेक रोग, बाहु में आघात, मित्र से भय, अकस्मात् व्याधि होती है।।२९।। सर्वत्रलभते लाभं गजाश्वं च धनागमम् । राजसन्मानदं राज्यं भवेद्राह्वन्तरे गुरुः ।।३०।। (रा.वृ.) राहु के अन्तर में गुरु के प्रत्यन्तर में सर्वत्र लाभ, हाथी, घोड़ा, धन का लाभ, राज सन्मान से युक्त राज्य की प्राप्ति होती है।।३०।। बंधनं जायते घोरं सुखहानिर्महद्भयम् । प्रत्यहं वातपीडा च राहौ राह्वन्तरे शनिः ।।३१।। (रा.श.) राहु के अन्तर में शनि के प्रत्यन्तर में घोर वंधन होता है। सुख की हानि और बड़ा भय और प्रतिदिन वायु से पीड़ा होती है।।३१।। सर्वत्र बहुधा लाभः स्त्री समश्र विशेषतः । परदेशगतिः सिद्धिं राहो राह्वन्तरे बुधः ।।३२।। (रा.बु.) राहु की दशा में बुध के प्रत्यन्तर में सर्वत्र अनेक लाभ स्त्री संसर्ग से विशेष लाभ और परदेश से विशेष सिद्धि होती है।।३२।। बुद्धिनाशो भयं विघ्नं धनहानिर्महद्भयम् । सर्वत्र कलहोद्वेगो राहो राह्वन्तरे शिखी ।।३३।। (रा.के.) राहु के अन्तर में केतु के प्रत्यन्तर में, बुद्धि का नाश, भय, विघ्न, धन की हानि, बड़ा भय और सर्वत्र कलह और द्वेष होता है।।३३।। योगिनीभ्योभयं भूयादश्वहानिः कुभोजनम् । स्त्रीनाशः कुलजं शोकं राहो राह्वंतरेसितः ।।३४।। (रा.शु.) राहु के अन्तर में शुक्र के प्रत्यंतर में योगिनी (पिशाचिनी आदि) से भय, घोड़े का नाश, खराब भोजन, स्त्री का नाश और कुलजनित शोक होता है।।३४।। ज्वररोगो महाभीतिः पुत्रपौत्रादिपीडनम् । अल्पमृत्युः प्रभादश्च राहो राह्वन्तरे रविः ।।३५।। (रा.सू.) राहु के अन्तर में सूर्य के प्रत्यन्तर में ज्वररोग, महाभय, पुत्र-पौत्र को पीड़ा, अपमृत्यु और प्रमाद होता है।।३५।। उद्वेगकलहो चिन्ता मानहानिर्भहद्भयम् । पितुर्विकलता देहे राहो राह्वन्तरे शशी ।।३६।। (रा.चं.)