बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 570, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें५७० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । बुध के प्रत्यन्तर में बुध के सूक्ष्मांतर में भाग्योदय, राजा से सम्मान की प्राप्ति, धन धान्य का लाभ और सबका प्रिय होता है।।५६।। बालग्रहाग्निभीस्तापः स्त्रीमदोद्भवदोषभाक् । कुमार्गी कुत्सिताशी च बुधसूक्ष्मगतेध्वजे ।।५७।। (बु.के.) बुध के प्रत्यंतर में केतु के सूक्ष्मांतर में बालग्रह तथा अग्नि से भय, ज्वर, स्त्री के रजोविकार से कष्ट, कुमार्ग में प्रवृत्ति और निंदित आन्नों का भोजन होता है।।५७।। वाहनंधन सम्पत्तिर्जलजान्नार्थसम्भवः । शुभकीर्तिर्महाभोगो बुधसूक्ष्मगते भृगौ ।।५८।। (बु.शु.) बुध के प्रत्यंतर में शुक्र के सूक्ष्मान्तर में वाहन, धन, सम्पत्ति और जल से उत्पन्न होने वाले अन्न और द्रव्य का लाभ, यशोवृद्धि और महाभोग प्राप्त होता है।।५८।। ताडनं नृपवैषम्यं बुद्धिस्खलनरोगभाक् । हानिर्जनापवादं च बुधसूक्ष्मगते रवौ ।।५९।। (बु.सू.) बुध के प्रत्यंतर में सूक्ष्मांतर में ताडना, राजा से शत्रुता, मंदबुद्धि होने का रोग, हानि और जनापवाद (कलंक) होता है।।५९।। सुभगः स्थिरबुद्धिश्च राजसन्मानसम्पदः । सुहृदां गुरुसंस्कारो बुधसूक्ष्मगते विधौ ।।६०।। (बु.चं.) बुध के प्रत्यंतर में चन्द्रमा के सूक्ष्मान्तर में सौभाग्य, स्थिर बुद्धि, राजा से सन्मान और संपत्ति का लाभ और मित्रों का समागम होता है।।६०।। अग्निदाहं विषोत्पत्तिर्जडत्वं च दरिद्रता । विभ्रमश्च महोद्वेगो बुधसूक्ष्मगते कुजे ।।६१।। (बु.मं.) बुध के प्रत्यंतर में भौम के सूक्ष्मांतर में अग्नि से जलने का तथा विष का भय, जड़ता, दरिद्रता, भ्रम और बड़ा उद्वेग होता है।।६१।। अग्निसर्पनृपाद्भीतिः कृच्छ्वादरिपराभवः । भूतावेशभ्रमाद्भ्रांतिर्बुधसूक्ष्मगतेप्यहौ ।।६२।। (बु.रा.) बुध के प्रत्यंतर में राहु के सूक्ष्मांतर में अग्नि, सर्प और राजा से भय। कष्ट से शत्रु का पराभव, भूत का आवेश और भ्रम से भ्रान्ति होता है।।६२।।