भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 571, कुल 800 में से

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पृष्ठ 571

·अथ सूक्ष्मान्तरदशाध्यायः । ५७१ ग्रहोपकरणं भव्यं त्यांगं भोगादिवैभवम् । राजप्रसादसम्पत्तिर्बुधसूक्ष्मगते भगौ ॥६३॥ (बु.बृ.) बुध के प्रत्यंतर में गुरु के सूक्ष्मांतर में गृह के सुन्दर उपकरणों का लाभ। त्याग भाव वैभव, राजा की प्रसन्नता से सम्पत्ति का लाभ होता है।।६३।। वाणिज्यवृत्तिलाभश्च विद्याविभवमेव च । स्त्रीलाभश्च महाव्याधिबुधसूक्ष्मगते शनौ ॥६४॥ (बु.श.) बुध के प्रत्यंतर में शनि के सूक्ष्मान्तर में व्यापार से लाभ, विद्या और वैभव का लाभ, स्त्री का लाभ और महाव्याधि की संभावना होती है।।६४।। इति बुधसूक्ष्मांतर फलम्। अथ केतोः प्रत्यन्तरे केत्वादीनां सूक्ष्मान्तरफलम् - पुत्रदारादिजं दुःखं गात्रवैषम्यमेव च । दारिद्र्याद्भिक्षुवृत्तिश्च केतोःसूक्ष्मदशाफलम् ॥६५॥ (के.के.) केतु के प्रत्यंतर में केतु के ही सूक्ष्मांतर में पुत्र, स्त्री जन्मादि दुःख, शरीर में विकलता और दरिद्रता से भिक्षुक वृत्ति होती है।।६५।। रोगनाशोऽर्थलाभश्च गुरुविप्रानुवत्सलः । संगमः स्वजनैः सार्धे केतोः सूक्ष्मगते भृगौ ॥६६॥ (के.शु.) केतु के प्रत्यंतर में शुक्र के सूक्ष्मांतर में रोग का नाश, धन का लाभ, गुरु और ब्राह्मण से प्रेम और स्वजनों का समागम होता है।।६६।। पुत्रभूमिविनाशश्च विप्रवासः स्वदेशतः । सुहृद्विपत्तिरार्त्तिश्च केतोः सूक्ष्मगते रवौ ॥६७॥ (के.सू.) केतु के प्रत्यंतर में सूर्य के सूक्ष्मान्तर में पुत्र-भूमि की हानि, स्वदेश से प्रवास मित्र की विपत्ति और पीड़ा होती है।।६७।। दासीदाससमृद्धिश्च युद्धे लब्धिर्जयस्तथा । ललिता कीर्त्तिरुत्पन्ना केतोः सूक्ष्मगते विधौ ॥६८॥ (के.चं.) केतु के प्रत्यंतर में चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में दासी, नौकर और समृद्धि का लाभ, युद्ध में द्रव्यलाभ और विजय और सुन्दर कीर्ति होती है।।६८।।