बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५७२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । आसने भयमश्वादेश्चौरदुष्टादिपीडनम् । गुल्मपीडा शिरोरोगः केतोः सूक्ष्मगते कुजो ।।६९।। (के.मं.) केतु के प्रत्यंतर में भौम के सूक्ष्मांतर में आसन और घोड़े से भय चोर और दुष्टो से पीड़ा, गुल्मरोग और शिर में पीड़ा होती है।।६९।। विनाशः स्त्रीगुरूणां च दुष्टस्त्रीसंगमाल्लघुः । वमनं रुधिरं पित्तं केतोः सूक्ष्मगतेऽप्यगौ ।।७०।। (के.रा.) केतु के प्रत्यंतर में राहु के सूक्ष्मांतर में स्त्री तथा गुरु का नाश, दुष्ट स्त्री के संग से अपयश और रुधिर तथा पित्त का वमन होता है।।७०।। वैरं विरोध सम्पत्तिः सहसा राजवैभवम् । पशुक्षेत्रविनाशस्यात्केतोः सूक्ष्मगते गुरौ ।।७१।। (के.बृ.) केतु के प्रत्यंतर में गुरु के सूक्ष्मांतर में वैर, विरोध होता है, सहसा राज वैभव का लाभ और पशु, क्षेत्र की हानि होती है।।७१।। मृषापीडां भवेत्क्षुद्रसुतोत्पत्तिश्चलंघनम् । स्त्रीविरोधः सत्यहानिः केतोः सूक्ष्मगते शनौ ।।७२।। (के.श.) केतु के प्रत्यंतर में शनि के सूक्ष्मान्तर में व्यर्थ ही पीड़ा, दुष्ट पुत्र की उत्पत्ति लंघन, स्त्री से विरोध और सत्य की हानि होती है।।७२।। नानाविधजनाप्तिश्च विप्रयोगोऽरपीड़नम् । अर्थसम्पत्समृद्धिश्च केतोः सूक्ष्मगते बुधे ।।७३।। (के.बु.) केतु के प्रत्यन्तर में बुध के सूक्ष्मांतर में अनेक लोगों से संयोग और वियोग, शत्रु से पीड़ा और धन-सम्पत्ति की वृद्धि होती है।।७३।। इति केतु सूक्ष्मांतर फलम्। अथशुक्रप्रत्यन्तरेशुकादीनांसूक्ष्मान्तरफलम् - शत्रुहानिर्महत्सौख्यं शंकरालयसम्भवम् । तडागकूपनिर्माणं शुक्रसूक्ष्मदशाफलम् ।।७४।। (शु.शु.) शुक्र के प्रत्यन्तर में शुक्र के सूक्ष्मान्तर में शत्रु की हानि, अपार सुख, शंकर के मंदिर का निर्माण वा तालाब कूआँ के निर्माण की संभावना होती है।।७४।। उरस्तापो भ्रमश्चैव गतागतविचेष्टितम् । कचिल्लाभः कृचिद्धानिर्भृगोः सूक्ष्मगतेरवौ ।।७५।। (शु.सू.)