भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 573, कुल 800 में से

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पृष्ठ 573

अथ सूक्ष्मान्तरदशाध्यायः । ५७३ शुक्र के प्रत्यन्तर में सूर्य के सूक्ष्मांतर में उरु प्रदेश में रोग भ्रम, गमनागमन की चेष्टा, कभी लाभ और कभी हानि होती है।।७५।। आरोग्यं धनसम्पत्तिः कार्यलाभोगतागतैः । वैरिकापारबुद्धिः स्याद्भृगोः सूक्ष्मगते विधौ ।।७६।। (शु.चं.) शुक्र के प्रत्यन्तर में चन्द्रमा के सूक्ष्मान्तर में आरोग्यता, धन सम्पत्ति का लाभ गमनागमन से कार्य की सिद्धि, अपार बुद्धि होती है।।७६।। जडत्वं रिपुवैषम्यं देशभ्रंशो महद्भयम् । व्याधिदुःखसमुत्पत्तिर्भृगोः सूक्ष्मगते कुजे ।।७७।। (शु.मं.) शुक्र के प्रत्यन्तर में भौम के सूक्ष्मान्तर में जड़ता, शत्रु से शत्रुता, देशत्याग, महाभय, व्याधि और दुःख की प्राप्ति होती है।।७७।। राज्याग्निसर्पजाभीतिर्बन्धुनाशो गुरुव्यथा । स्थानच्युतिर्महाभीतिभृगोः सूक्ष्मगतेप्यहौ ।।७८।। (शु.रा.) शुक्र के प्रत्यन्तर में राहु के सूक्ष्मान्तर में राजा, अग्नि और सर्प से भय, बन्धु का नाश, व्यथा, स्थानच्युति (अवनति) और महाभय होता है।।७८।। सर्वत्रकार्यलाभश्च क्षेत्रार्थविमनोन्नतिः । वणिग्वृत्तेर्महालब्धिर्भृगोः सूक्ष्मगतेगुरौ ।।७९।। (शु.वृ.) शुक्र के प्रत्यन्तर में गुरु के सूक्ष्मांतर में सभी कार्यों में लाभ, क्षेत्र धन और वैभव की उन्नति और व्यापार से लाभ होता है।।७९।। शत्रुपीड़ा महद्दुःखं चतुष्पादविनाशनम् । स्वगोत्रगुरुहानिः स्याद्भृगोः सूक्ष्मगते शनौ ।।८०।। (शु.शं.) शुक्र के प्रत्तन्तर में शनि के सूक्ष्मान्तर में शत्रु पीड़ा, महादुःख, चौपायों की हानि, अपने गोत्रजों की हानि होती है।।८०।। बांधवादिशु सम्पत्तिर्व्यवहारो धनोन्नतिः । पुत्रदारादितः सौख्यं भृगोः सूक्ष्मगते बुधे ।।८१।। (शु.बु.) शुक्र के प्रत्यन्तर में बुध के सूक्ष्मान्तर में बांधवों से सम्पत्ति का लाभ व्यवहार, धन की उन्नति और पुत्र स्त्री आदि से सुख होता है।।८१।।