बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ प्राणदशा फलाध्यायः। ५७७ धर्मबुद्धिः क्षमाप्राप्तिर्देवब्राह्मणपूजनम् । सौभाग्यं प्रियदृष्टिश्च चन्द्रप्राणगते गुरौ ॥१९४॥ (चं.बृ.) चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में गुरु की प्राणदशा में धर्मबुद्धि, क्षमा की प्राप्ति, देवता और ब्राह्मण का पूजन और भाग्योदय होता है॥१९४॥ सहसा देहपतनं शत्रुपद्रववेदना । अंधत्वं च धनप्राप्तिश्चन्द्रप्राणगते शनौ ॥१९५॥ (चं.श.) चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में शनि की प्राणदशा में अकस्मात् शरीर का पतन, शत्रुओं का उपद्रव, नेत्रान्धता और धन का लाभ होता है॥१९५॥ चामरछत्रसंप्राप्ती राज्यलाभो नृपात्ततः । समत्वं सर्वभूतेषु चन्द्रप्राणगते बुधे ॥१९६॥ (चं.बु.) चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में बुध की प्राणदशा में राजा से चामर छत्र और राज्य का लाभ और सभी प्राणियों में समदृष्टि होती है॥१९६॥ शस्त्राग्नि रिपुजापीडा विषाग्नि कुक्षिरोगता । पुत्रदारवियोगश्च चन्द्रप्राणगते शिखी ॥१९७॥ (चं.के.) चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में केतु की प्राणदशा में शस्त्र, अग्नि और शत्रु से पीड़ा, विष भय, कुक्षिगत रोग और पुत्र स्त्री से वियोग होता है॥१९७॥ पुत्रमित्रकलत्राप्तिर्विदेशाच्च धनांगयः । सुखसम्पत्तिरर्थश्च चन्द्रप्राणगते भृगौ ॥१९८॥ (चं.शु.) चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में शुक्र की प्राणदशा में पुत्र मित्र स्त्री आदि का लाभ विदेश से धन का लाभ और सुख सम्पत्ति का लाभ होता है॥१९८॥ तीव्रदोषी प्रदोषी च प्राणहानिर्मनोरुजम् । देशत्यागो महाभीतिश्चन्द्रप्राणगते रवौ ॥१९९॥ (क.सू.) चन्द्रमा के सूक्ष्मांतर में सूर्य की प्राणदशा में तीव्र दोष से प्राणहानि की संभावना देश त्याग और महाभय होता है॥१९९॥ इति चन्द्रप्राणदशाफलम्। अथ भौमप्राणदशाफलम्- युद्धे परजनाद्वद्धः शास्त्रेण परकेन वा । मृत्युना मरणं याति भौमे प्राणदशा फलम् ॥२००॥ (मं.मं.)