भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 578

५७८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । भौम के सूक्ष्मांतर में भौम के प्राणदशा में युद्ध में शत्रु से बँधने वा शत्रु के शस्त्र से बँधन और मृत्यु बात तुल्य कष्ट होता है।।२०।। विच्युतः सुतदारादिवंधूपद्रवपीडितः । प्राणत्यागो विषेणैव भौमप्राणगतेप्यहौ ।।२१।। (मं.श.) भौम के सूक्ष्मांतर में राहु की प्राणदशा में पुत्र स्त्री से रहित, बंधुओं के उपद्रव से पीड़ा और विष से प्राणनाश होता है।।२१।। देवार्चनपरः श्रीमान्मन्त्रानुष्ठानतत्परः । पुत्रपौत्र सुखावाप्तिर्भौमप्राणगते गुरौ ।।२२।। (मं.वृ.) भौम के सूक्ष्मांतर में गुरु की प्राणदशा में देवता का पूजन में तत्पर, लक्ष्मी की प्राप्ति, मन्त्र के अनुष्ठान में तत्पर और पुत्र-पौत्र के सुख की प्राप्ति होती है।।२२।। अग्निबाधा भवेन्मृत्युरर्थनाशः पदच्युतिः । बंधुभिर्वधुतावाप्तिर्भौमप्राणगते शनौ ।।२३।। (मं.श.) भौम के सूक्ष्मांतर में शनि की प्राणदशा में अग्नि से बाधा, मृत्यु, धन का नाश, पद की अवनति और भाइयों से भ्रातृत्व का लाभ होता है।।२३।। दिव्याम्बरसमुत्पत्तिर्दिव्याभरण भूषितः । दिव्याङ्गनायाः सम्प्राप्तिर्भौमप्राणगते बुधे ।।२४।। (मं.बु.) भौम के सूक्ष्मान्तर में बुध की प्राणदशा में दिव्यवस्त्र का लाभ, दिव्य आभूषण का लाभ और दिव्य स्त्री का लाभ होता है।।२४।। पतनोत्पातपीडा च नेत्रक्षोभो महद्भयम् । भुजङ्गाच्च महाहानिर्भौम प्राणगते ध्वजे ।।२५।। (मं.के.) भौम के सूक्ष्मान्तर में केतु की प्राणदशा में पतन, उत्पात् - पीड़ा, नेत्र में पीड़ा महाभय और सर्प से हानि होती है।।२५।। धनधान्यादि सम्पत्तिर्लोकपूजा सुखावहा । नाना भोगैर्भवेद्रोगी भौम प्राणगते भृगौ ।।२६।। (मं.शु.) भौम के सूक्ष्मान्तर में शुक्र की प्राणदशा में धन, धान्य आदि सम्पत्ति का लाभ, लोक में प्रतिष्ठा और अनेक भोगों से रोग की संभावना होती है।।२६।।