भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 579

अथ प्राणदशा फलाध्यायः। ५७९ ज्वरोन्मादः क्षयोऽर्थस्य राजविद्रोहसम्भवः । दीर्घरोगो दरिद्रः स्याद्भौमप्राणगते रवौ ॥२७॥ (मं.सू.) भौम के सूक्ष्मांतर में सूर्य की प्रशदशा में ज्वर, उन्माद, धन की हानि, राजा से विद्रोह की संभावना, दीर्घ रोग और दरिद्रता होती है॥२७॥ भोजनादि सुख प्रीतिर्वस्त्राभरण वांछितम् । शीतोष्णव्याधिपीडा च भौमप्राणगते विधौ ॥२८॥ (मं.चं.) भौम के सूक्ष्मांतर में चंद्रमा की प्राण दशा में भोजन आदि के सुख का लाभ, अभीष्ट वस्त्र आभूषण का लाभ और सर्दी गर्मी से कष्ट होता है॥२८॥ इति भौम प्राणदशा फलम्। अथ राहोः प्राणदशा फलम्- अन्नाशने विरक्तश्च विषभीतिस्तथैव च । सहसाधननाशश्च राहोः प्राणदशाफलम् ॥२९॥ (रा.रा.) राहु के सूक्ष्मान्तर में राहु की प्राण दशा में अन्न भोजन से विरक्ति विष से भय, और सहसा धन का नाश होता है॥२९॥ अङ्गसौख्यं विनिर्भीतिर्वाहनादेश्च व्यग्रता । नीचैः कलहसम्प्राप्ती राहोः प्राणगते गुरौ ॥३०॥ (रा.वृ.) राहु के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में शरीर सुख, निर्भयता, वाहन आदि से व्यग्रता और नीचों से कलह की संभावना होती है॥३०॥ गृहदाहशरीरे च नीचैरपहृतं धनम् । रोगबंधन सम्प्राप्ती राहोः प्राणगते शनौ ॥३१॥ (रा.श.) राहु के सूक्ष्मान्तर में शनि की प्राणदशा में गृह और शरीर में अग्नि का भय, नीच से धन का अपहरण, रोग बंधन की प्राप्ति होती है॥३१॥ गुरुपदेश विभवो गुरुसत्कारवर्धनम् । गुणवांञ्छीलवांश्चापि राहोः प्राणगते बुधे ॥३२॥ (रा.बु.) राहु की दशा में बुध की प्राण दशा में गुरु के उपदेश से वैभव प्राप्ति, गुरु के सत्कार में वृद्धि, गुण और शील में वृद्धि होती है॥३२॥