बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५८० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । स्त्रीपुत्रादि विरोधश्च गृहान्निष्क्रमणादयः । साक्षात्कार्यस्यहानिश्च राहोः सूक्ष्मगते ध्वजे ॥३३॥ (रा.के.) राहु के सूक्ष्मान्तर में केतु की प्राण दशा में स्त्री-पुत्र आदि से विरोध गृह त्याग और साक्षात् कार्य की हानि होती है॥३३॥ छत्रवाहनसम्पत्तिः सर्वार्थफलसंचयः । शिवार्चन गृहारम्भो राहोः प्राणगते भृगौ ॥३४॥ (रा.शु.) राहु के सूक्ष्मान्तर में शुक्र की प्राणदशा में छत्र वाहन आदि सम्पत्ति का लाभ सभी प्रकार के लाभ और संचय और शिवपूजन तथा गृहारम्भ होता है॥३४॥ अर्शादिरोगभीतिश्च राज्योपद्रवसम्भवः । चतुष्पदादिहानिश्च राहोः प्राणगते रवौ ॥३५॥ (रा.सू.) राहु के सूक्ष्मान्तर में सूर्य की प्राणदशा में अर्श (बवासीर) आदि रोग का भय, राजा से उपद्रव की संभावना और चौपाये जानवरों की हानि होती है॥३५॥ सौमनस्यं च सद्बुद्धिः सत्कारो गुरुदर्शनम् । पापभीतिर्मनः सौख्यं राहोः प्राणगते विधौ ॥३६॥ (रा.चं.) राहु के सूक्ष्मान्तर में चन्द्रमा की प्राणदशा में सज्जनता, सत्कार और गुरु का दर्शन, पाप से भय तथा सुख होता है॥३६॥ चांडालाग्निवशाद्धीतिः स्वपदच्युतिरापदः । मलिनः श्वादिवृत्तिश्च राहोः प्राणगते कुजे ॥३७॥ (रा.मं.) राहु के सूक्ष्मान्तर में भौम की प्राणदशा में चांडाल और अग्नि से भय, अवनति और आपत्ति, मलिनता और कुत्ते की वृत्ति होती है॥३७॥ इति राहोः प्राणदशा फलम्। अथ गुरोः प्राणदशा फलम्- शोकनाशो धनाधिक्यंमग्निहोत्रं शिवार्चनम् । वाहनं छत्रसंयुक्तं जीवप्राणदशाफलम् ॥३८॥ (वृ.वृ.) गुरु के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में शोकादि का नाश, धन की वृद्धि, अग्नि होत्र, शिव का पूजन और वाहन छत्र का सुख होता है॥३८॥