भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथ प्राणदशा फलाध्यायः । ५८१ व्रतहा सूर्यवर्तिश्च विदेशे वसुनाशनम् । विरोधो धननाशश्च गुरोः प्राणगते शनौ ।।३९।। (वृ.श.) गुरु के सूक्ष्मान्तर में शनि की प्राण दशा में व्रत की हानि, विदेश में धन की हानि विरोध और धन की हानि होती है।।३९।। विद्याधर्मविवृद्धिश्च गुरुब्राह्मणपूजनम् । भाग्योदयसुखप्राप्तिर्गुरोः प्राणगते बुधे ।।४०।। (वृ.बु.) गुरु के सूक्ष्मान्तर में बुध की प्राणदशा में विद्या और धर्म की वृद्धि, गुरु और ब्राह्मण का पूजन, भाग्योदय और सुख का लाभ होता है।।४०।। ज्ञानं विभवपांडित्यं शास्त्रश्रोता शिवार्चनम् । अग्निहोत्रं गुरोर्भक्तिर्गुरोः प्राणगते ध्वजे ।।४१।। (वृ.के.) गुरु के सूक्ष्मान्तर में केतु के प्राण दशा में ज्ञान, वैभव और पांडित्य, शास्त्र श्रवण, शिवपूजन, अग्नि होत्र और गुरु भक्ति होती है।।४१।। रोगान्मुक्तिः सुखं भोगं धन धान्यसमागमम् । पुत्रदारादि सौख्यं गुरोः प्राणगते भृगौ ।।४२।। (वृ.शु.) गुरु के सूक्ष्मान्तर में शुक्र के प्राण दशा में रोग से मुक्ति, सुख, भोग, धन, धान्य का आगमन, पुत्र स्त्री का सुखं होता है।।४२।। वातपित्तप्रकोपं च श्लेष्मोद्रेकं तु दारूणम् । रसव्याधिकृतं शूलं गुरोः प्राणगते रवौ ।।४३।। (वृ.सू.) गुरु के सूक्ष्मान्तर से सूर्य के प्राण दशा में वायु पित्त के प्रकोप से कष्ट, और भयंकर कफवृद्धि तथा रस से उत्पन्न व्याधि होती है।।४३।। छत्रचामरसंयुक्तं वैभवंपुत्रसम्पदम् । नेत्रकुक्षिगता पीडा गुरोः प्राणगतेविधौ ।।४४।। (वृ.चं) गुरु के सूक्ष्मान्तर में चन्द्रमा की प्राण दशा में छत्र चामर का सुख, वैभव, पुत्र सम्पत्ति का लाभ और नेत्र तथा कुक्षि (कोष्ठय) में कष्ट होता है।।४४।। स्त्रीजनाच्च विषोत्पत्तिर्वधनं चातिविग्रहः । देशांतरगमोभ्रांतिर्गुरोः प्राणगते कुजे ।।४५।। (वृ.मं.)