भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 582, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 582

५८२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । गुरु के सूक्ष्मान्तर में भौम की प्राणदशा में स्त्रियों से कष्ट बंधन अत्यंत विरोध देशांतर की यात्रा और भ्रांति होती है॥४५॥ व्याधिभिः परिभूतः स्याच्चौरैरपहृतं धनम् । सर्पवृश्चिकदष्टत्वं गुरोः प्राणगतेप्यहौ ॥४६॥ (वृ.रा.) गुरु के सूक्ष्मान्तर में राहु की प्राणदशा में व्याधि से व्याप्त, चोर द्वारा द्रव्य की हानि सर्प-बिच्छू के काटने का भय होता है॥४६॥ इति गुरोः प्राणदशा फलम्। अथ शनेः प्राणदशा फलम्- ज्वरेण ज्वलिता कान्तिःकुष्ठरोगोदरादिरूक् । जलाग्निकृतमृत्युः स्यान्मन्दप्राणदशाफलम् ॥४७॥ (श.श.) शनि के सूक्ष्मांतर में शनि की प्राणदशा में ज्वर से कान्ति नष्ट हो जाती है, कुष्ठ रोग की संभावना, जल अग्नि से मृत्यु की संभावना होती है॥४७॥ धनं धान्यं च मांगल्यं व्यवहाराभिपूजनम् । देवब्राह्मणभक्तिश्चः शनैः प्राणगते बुधे ॥४८॥ (श.बु.) शनि के सूक्ष्मान्तर में बुध की प्राणदशां में धन, धान्य, मंगल कृत्य, व्यवहार से पूजन, देवता ब्राह्मण में भक्ति होती है॥४८॥ मृत्युवेदन दुःखं च भूतोपद्रवसंभवः । परदाराभिभूतत्वं शनैः प्राणगते ध्वजे ॥४९॥ (श.के.) शनि के सूक्ष्मान्तर में केतु की प्राणदशा में मृत्यु तुल्य कष्ट, भूत उपद्रव की संभावना और पर स्त्री के वश में होने की संभावना होती है॥४९॥ पुत्रार्थविभवैः सौख्यं क्षितिपालादिना सुखम् । अग्निहोत्रं विवाहश्च शनैः प्राणगते भृगौ ॥५०॥ (श.शु.) शनि के सूक्ष्मान्तर में शुक्र की प्राणदशा में पुत्र, धन और वैभव का सुख, राजा आदि से सुख, अग्निहोत्र और विवाह होता है॥५०॥ अग्निपीडा शिरोव्याधिः सर्पशत्रुभयं भवेत् । अर्थहानिः महाक्लेशः शनैः प्राणगते रवौ ॥५१॥ (श.सू.)