बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ प्राणदशा फलाध्यायः। ५८३ शनि के सूक्ष्मान्तर में सूर्य की प्राणदशा में अग्नि से कष्ट, शिर का रोग, सर्प तथा शत्रु से भय, धन की हानि और महाकष्ट होता है।।५१।। आरोग्यं पुत्रलाभश्च शान्तिपौष्टिक वर्धनम् । देवब्राह्मणभक्तिश्च शनेः प्राणगते विधौ ।।५२।। (श.चं.) शनि के सूक्ष्मान्तर में चंद्रमा की प्राणदशा में आरोग्यता, पुत्र का लाभ, शान्तिक पौष्टिक क्रियायों की वृद्धि और देवता ब्राह्मण में भक्ति होती है।।५२।। गुल्मरोगः शत्रुभीतिर्मृगया प्राणनाशनम् । सर्पाग्निशत्रुतोभीतिः शनेः प्राणगते कुजे ।।५३।। (श.मं.) शनि के सूक्ष्मान्तर में भौम की प्राणदशा में गुल्म रोग। शत्रु का भय, प्राण जाने का भय, सर्प तथा अग्नि से भय होता है।।५३।। देशत्यागो नृपाद्भीतिर्मोहनं विषभक्षणम् । वातपित्तकृतापीड़ा शनेः प्राणगतेप्यहौ ।।५४।। (श.रा.) शनि के सूक्ष्मान्तर में राहु की प्राणदशा में देश का त्याग, राजा से भय और अहित, विषपान, वायु-पित्त से कष्ट होता है।।५४।। सेनापत्यं भूमिलाभं संगमं स्वजनैः सह । गौरवं बुधसन्मानं शनेः प्राणगते गुरौ ।।५५।। (श.बृ.) शनि के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में सेनापति का अधिकार, भूमि का लाभ, आत्मीय जनों से समागम, गुरुता और राजा से सम्मान होता है।।५५।। इति शनेः प्राणदशा फलम्। अथ बुध प्राणदशा फलम्- आरोग्यं सुखसम्पत्तिर्धर्मकर्मादिसाधनम् । समत्वं सर्वभूतेषु बुधप्राणदशाफलम् ।।५६।। (बु.बु.) बुध के सूक्ष्मान्तर में बुध की प्राणदशा में आरोग्यता, सुख संपत्ति, धर्म कर्म आदि का साधन और सभी प्राणियों में समता होती है।।५६।। दहनं चौरविद्धांगं परमाधिविषोद्भवा । देहांतकरणे दुःखं बुधप्राणगते ध्वजे ।।५७।। (बु.के.)