भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 584

५८४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । बुध के सूक्ष्मान्तर में केतु की प्राणदशा में अग्नि भय, चौर से शरीर में चोट और विष से व्याधि की संभावना तथा मरण तुल्य कष्ट होता है।।५७।। प्रभुत्वं धनसम्पत्तिः कीर्तिर्धर्मः शिवार्चनम् । पुत्रदारादिकं सौख्यं बुधप्राणगते भृगौ ।।५८।। (बु.शु.) बुध के सूक्ष्मान्तर में शुक्र की प्राणदशा में प्रभुता, धन संपत्ति का लाभ, कीर्त्ति, धर्म और शिव पूजन, और पुत्र स्त्री का सुख होता है।।५८।। अन्तर्दाहोज्वरोन्मादौ बांधवानां रतिः स्त्रिया । पापनिस्तेय सम्पत्तिर्बुधप्राणगते रवौ ।।५९।। (बु.सू.) बुध के सूक्ष्मान्तर में सूर्य की प्राणदशा में अंतर्गत दाह, ज्वर और उन्माद बांधवों से तथा स्त्री से प्रेम और पापाचार से संपत्ति का लाभ होता है।।५९।। स्त्रीलाभश्चार्थसम्पत्तिः कन्यालाभो धनागमः । लभते सर्वतः सौख्यं बुध प्राणगते विधौ ।।६०।। (बु.चं.) बुध के सूक्ष्मान्तर में चंद्रमा की प्राणदशा में स्त्री, धन सम्पत्ति का लाभ, कन्या की उत्पत्ति, धन का आगम और सर्वत्र सुख की प्राप्ति होती है।।६०।। पतितः कुक्षिरोगी च दंतनेत्रादिजा व्यथा । अर्शार्तिः प्राणसंदेहो बुधप्राणगते कुजे ।।६१।। (बु.मं.) बुध के सूक्ष्मान्तर में भौम की प्राणदशा में पतन, कुक्षि में रोग, दांत नेत्र में पीड़ा अर्श रोग और प्राण हानि की संभावना होती है।।६१।। वस्त्राभरणसम्पत्तिः वियोगो विप्रवैरिता । सन्निपातोद्भवं दुःखं बुधप्राणगतेप्यहौ ।।६२।। (बु.रां.) बुध के सूक्ष्मान्तर में राहु की प्राणदशा में वस्त्र आभूषण आदि संपत्ति से वियोग, ब्राह्मण से वैर, सन्निपात रोग से कष्ट होता है।।६२।। गुरुत्वं धनसम्पत्तिर्विद्या सद्गुण संग्रहः । व्यवसायेन सल्लाभो बुधप्राणगते गुरौ ।।६३।। (बु.वृ.) बुध के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में गुरुता, धन संपत्ति विद्या और अच्छे गुणों का संग्रह, और व्यवसाय से लाभ होता है।।६३।। चौर्येण निधनप्राप्तिर्विधनत्वं दरिद्रता । याचकत्वं विशेषेण बुधप्राणगते शनौ ।।६४।। (बु.श.)