भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 585

अथ प्राणदशा फलाध्यायः। ५८५ बुध के सूक्ष्मान्तर में शनि की प्राणदशा में चोर से मृत्युभय, निर्धनता और भिक्षावृत्ति का प्रादुर्भाव होता है॥६४॥ इति बुध प्राणदशा फलम्। अथ केतोः प्राणदशा फलम्- अश्वपातेन घातं च पादस्खलनमेवच। निर्विचारवधोत्पत्तिः केतोः प्राणदशाफलम्॥६५॥(के.के.) केतु के सूक्ष्मान्तर में केतु की प्राणदशा में घोड़े पर से गिरने से चोट, पैर फिसलने से चोट, कुत्सित विचार की उत्पत्ति होती है॥६५॥ क्षेत्रलाभो वैरिनाशो हयलाभो मनः सुखम्। पशुक्षेत्रधनाप्तिश्च केतोः प्राणगते भृगौ॥६६॥(के.शु.) केतु के सूक्ष्मान्तर में शुक्र की प्राणदशा में कुशल-लाभ, शत्रुओं का नाश, मन को सुख, पशु, क्षेत्र और धन का लाभ होता है॥६६॥ स्तेयाग्निरिपुभीत्यादिघातश्चैवावरोधयुक् । प्राणांतकरणं कृच्छ्रं केतोः प्राणगते रवौ॥६७॥(के.सू.) केतु के सूक्ष्मान्तर में सूर्य के प्राणदशा में चोर, अग्नि और शत्रु का भय, अवरोध जनित घात और प्राणांत तुल्य कष्ट होता है॥६७॥ देवद्विजगुरोः पूजा दीर्घयात्रा धनं सुखम्। कंठाश्रिते नेत्ररोगो केतोः प्राणगते विधौ॥६८॥(के.चं.) केतु के सूक्ष्मान्तर में चन्द्रमा की प्राणदशा में देवता, ब्राह्मण और गुरु की पूजा दूर की यात्रा, धन और सुख, कंठ और नेत्र का रोग होता है॥६८॥ तीव्ररोगोलसावृद्धिर्विभ्रमः सन्निपातजः। स्वबंधुजनविद्वेषः केतोः प्राणगते कुजे॥६९॥(के.मं.) केतु के सूक्ष्मान्तर में भौम के प्राणदशा से तीव्र रोग, आलसी बुद्धि, सन्निपात से भ्रम रोग और अपने बंधुओं से विरोध होता है॥६९॥ विरोधः स्त्रीसुताद्यैश्च गृहान्निष्क्रमणंभवेत्। स्वसाहसात्कार्यहानिः केतोः प्राणगतेप्यहौ॥७०॥(के.रा.)