भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 586

५८६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । केतु के सूक्ष्मांतर में राहु की प्राणदशा में स्त्री, पुत्र आदि से विरोध, घर से निकाला होता है और साहस करने से कार्य की हानि होती है।।७०।। शस्त्रव्रणैर्महारोगैर्हृत्पीडादिसमुद्भवः । सुतदारवियोगश्च केतो प्राणगते गुरौ ।।७१।। (के.बु.) केतु के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में शस्त्र, व्रण और महारोग से हृदय में पीड़ा की संभावना, पुत्र, स्त्री आदि से वियोग होता है।।७१।। मतिविभ्रमतीक्ष्णश्च क्रूरकर्मरतः सदा । व्यसनाद्बंधनं दुःखं केतोः प्राणगते शनौ ।।७२।। (के.श.) केतु के सूक्ष्मान्तर में शनि की प्राणदशा में बुद्धि में भ्रम, स्वभाव में तीक्ष्णता, सदा क्रूरकर्म में आसक्त, व्यसन से बंधन और दुःख होता है।।७२।। कुसुमं शयनं भूषा लेपनं भोजनादिकम् । सौख्यं सर्वाङ्गभोग्यं च केतोः प्राणगते बुधे ।।७३।। (के.बु.) केतु के सूक्ष्मान्तर में बुध की प्राणदशा में पुष्प शय्या, आभूषण, लेपन, भोजनादि की प्राप्ति, सुख और सर्वांग का भोग प्राप्त होता है।।७३।। इति केतोः प्राणदशा फलम्। अथ भृगोः प्राणदशा फलम्- ज्ञानमीश्वरभक्तिश्च तोषकर्मरसायनम् । पुत्रपौत्रसमृद्धिश्च शुक्रप्राणगते फलम् ।।७४।। (शु.शु.) शुक्र के सूक्ष्मान्तर में शुक्र के प्राणदशा में ज्ञान की प्राप्ति ईश्वर में भक्ति, संतोष, रसायन और पुत्र पौत्र तथा समृद्धि का लाभ होता है।।७४।। लोकप्रकाशकीर्तिश्च सुतसौख्यं विवर्जितः । उष्णादिरोगजं दुःखं शुक्रप्राणगते रवौ ।।७५।। (शु.सू.) शुक्र के सूक्ष्मांतर में सूर्य के प्राणदशा में संसार में कीर्त्ति, पुत्र सुख से हीन, गर्मी से रोग और दुःख होता है।।७५।। देवार्चनैकर्मरतिर्मन्त्रतोषणतत्परः । धनसौभाग्यसम्पत्तिः शुक्रप्राणगते विधौ ।।७६।। (शु.चं.)