बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ प्राणदशा फलाध्यायः। ५८७ शुक्र के सूक्ष्मान्तर में चन्द्रमा की प्राणदशा में देवपूजन में प्रवृत्ति, संतोष, धन, सौभाग्य और सम्पत्ति का लाभ होता है॥७६॥ ज्वरो मसूरिका स्फोटकंडूचिपिटकादिकाः । देवब्राह्मणपूजा च शुक्र प्राणगते कुजे ।।७७।। (शु.मं.) शुक्र के सूक्ष्मान्तर में भौम की प्राणदशा में ज्वर, मसरिका, चेचक, खलुली, रोग और देवता ब्राह्मण का पूजन होता है।।७७।। नित्यं शत्रुकृता पीडा नेत्रकुक्षिरुजादयः । विरोधः सुहृदां पीडा शुक्र प्राणगतेप्यहौ ।।७८।। (शु.रा.) शुक्र के सूक्ष्मान्तर में राहु की प्राणदशा में नित्य शत्रु से पीड़ा नेत्र, कुक्षि में रोग, मित्रों से विरोध और पीड़ा होती है।।७८।। आयुरारोग्यमैश्वर्यं पुत्रस्त्री धनवैभवम् । छत्रवाहनसंप्राप्तिः शुक्रप्राणगते गुरौ ।।७९।। शुक्र के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में आयु, आरोग्यता और ऐश्वर्य की प्राप्ति, पुत्र स्त्री धन का सुख द्रव्य वाहन का लाभ होता है।।७९।। राजोपद्रवजाभीतिः सुखहानिर्महारुजः । नीचैः सह विवादं च शुक्रप्राणगते शनौ ।।८०।। (शु.श.) शुक्र के सूक्ष्मान्तर में शनि की प्राणदशा में राजा के उपद्रव का भय, सुख, की हानि महारोग और नीचों से विवाद होता है।।८०।। संतोषं राजसन्मानं नानादिग्भूमिसम्पदः । नित्यमुत्साहवृद्धिः स्याच्छुक्रप्राणगते बुधे ।।८१।। (शु.बु.) शुक्र के सूक्ष्मान्तर में बुध की प्राणदशा में संतोष, राजा से सम्मान, अनेक दिशा से भूमि सम्पत्ति का लाभ और नित्य उत्साह में वृद्धि होती है।।८१।। जीवितात्मयशोहानिर्धनधान्यपरिच्छदः । त्यागयोगधनानिस्युः शुक्रप्राणगते ध्वजे ।।८२।। (शु.के.) शुक्र के सूक्ष्मान्तर में केतु की प्राणदशा में आत्मा, यश की हानि, धन धान्य की हानि और त्यागवृत्ति होती है।।८२।। इति भृगोः प्राणदशाफलम्।