बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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५८८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । अथ समस्त ज्योतिः शास्त्रतत्वकामधेनुरूपम् सुदर्शन चक्रम्। [सुदर्शन चक्र: लग्न, चन्द्र तथा सूर्य से द्वादश भावों एवं ग्रहों की स्थिति] सुदर्शनं द्वादशारं जन्मभेन्द्वर्कराशितः । ग्रहान् संस्थाप्य भावेषु वर्षमासादिकल्पयेत् ।।१।। केन्द्रकोणाष्टगो राहुः पापात्यै च शुभोमुदे । विरिःफादि शुभैः पापैस्त्रिषडायेषु बै शुभम् ।।२।। तं तं भावं प्रकल्प्यांगं तत्तत्तन्वादिजं फलम् । गुरुपदेशात्संवाच्यं भोजनं स्वप्नपूर्वकम् ।।३।।