भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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६० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् विषमे त्रिंशांशचक्रम्— समराशौ त्रिंशांशचक्रम्—

अं.स्वामीमे.मि.सिं.तु.घ.कुं.वृ.क.क.वृ.म.मी.स्वामी
वह्निमं.मं.मं.मं.मं.मं.शु.शु.शु.शु.शु.शु.जलद
१०वायुश.श.श.श.श.श.१२बु.बु.बु.बु.बु.बु.घनद
१८इन्द्रबृ.बृ.बृ.बृ.बृ.बृ.२०बृ.बृ.बृ.बृ.बृ.बृ.इन्द्र
२५घनदबु.बु.बु.बु.बु.बु.२५श.श.श.श.श.श.वायु
३०जलदशु.शु.शु.शु.शु.शु.३०मं.मं.मं.मं.मं.मं.वह्नि

अथ खवेदांशमाह— चत्वारिंशतिभागानामधिपा विषमे क्रियात्। विष्णुश्चन्द्रो मरीचिश्च त्वष्टा धाता शिवो रविः ॥२८॥ यमो यक्षेशगन्धर्वः कालो वरुण एव च। समभे तुलतो ज्ञेयाः स्वस्वाधिपसमन्विताः ॥२९॥ विषम राशि में मेष से और सम राशि में तुला राशि से ४०वाँ अंश आरम्भ होता है। क्रम से विष्णु, चन्द्र, मरीचि, त्वष्टा, धाता, शिव, रवि, यम, यक्षेश, गंधर्व, काल, वरुण यही स्वामी होते हैं ।। २८-२९ ।। उदाहरण—लग्न ९।१५।२२।३७ है। एक चालीसवाँ अंश ४५ कला का होता है। इस हिसाब से २१वाँ भाग मिथुन राशि बुध का अंश और यक्षेश स्वामी हुए। खवेदांशचक्रम्—

सं.स्वामीमे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.घ.म.कुं.मी.अं.क.
विष्णु०।४५
चन्द्रः१।३०
मरीचि२।१५
त्वष्टा१०१०१०१०१०१०३।०
धाता११११११११११११३।४५
शिव१२१२१२१२१२१२४।३०
रवि५।१५
यम६।०
यक्षेश६।४५
१०गंधर्व१०१०१०१०१०१०७।३०
११काल११११११११११११८।१५
१२वरुण१२१२१२१२१२१२९।०
१३विष्णु९।४५

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