भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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५९० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । वार्षिक भविष्यवाणियाँ- सुदर्शन चक्र से वार्षिक फल कहने के लिये जन्म से प्रथम १२ मास तक प्रथम भाव को लग्न मानकर किया जाता है। दूसरे वर्ष में द्वितीय भाव को लग्न माना जाता है, तीसरे वर्ष में तीसरा स्थान ही लग्न माना जाता है। इस प्रकार में लग्न प्रति वर्ष एक-एक राशि खिसकता जाता है। वार्षिक भविष्यवाणियों में मंदगति वाले ग्रहों राहु केतु शनि आदि का ही विचार किया जाता है। १२।२४।३६।४८ वें वर्ष के अन्त में वैसी ही स्थिति हो जाती है जैसी कि जन्मकाल में होती है। इसी प्रकार लग्नादि १२ भाव एक-एक मास के द्योतक होते हैं। दिन फल कहने के लिये एक-एक भाव में ढाई दिन कल्पना करना चाहिये। अथ राहुदृष्टिमाहुः- सुतमदननवांते पूर्णदृष्टिं तमस्य युगलदशमगेहे चार्धदृष्टिंवदन्ति । सहजरिपुविपश्यन् पाददृष्टिं मुनीन्द्रा निजभवनमुपेतोलोचनान्धः प्रदिष्टः ।। ग्रहाणामुदयवर्षाणि- आकृत्योजिनसम्मितागजकरा नेत्राग्नयः षोडश- तत्त्वान्यङ्गगुणाद्विवेद प्रमिताः सूर्यादिकानां समा यः खेटः स्वगृहे स्वतुङ्गभवने षड्वर्गशुद्धश्च यः- तस्याब्दे हि नृणां भवेदति सुखं भाग्योदयो निश्चितम् ।। इति सुदर्शनचक्र विवरणं समाप्तम्। इति वृहत्पाराशरहोरायाः पूर्वार्धे सूर्यादि ग्रहाणां प्राणदशा फलाध्यायः। समाप्तश्चायं पूर्वार्धभागः।