बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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६१६ • वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । ग्रह में उसके नीच राश्यादि को घटाकर शेष ६ राशि से अधिक हो तो १२ राशि में घटाकर शेष का अंश बनाकर उसमें तीन का भाग देने से फल उच्चबल होता है॥८॥ उदाहरण- जैसे सूर्य राश्यादि ३।१८।२६।३४ इसका नीच राश्यादि ६।१० है इसको सूर्य में घटाने से शेष राश्यादि ९।८।२६।३४ बचा यह ६ राशि से अधिक इसलिये इसे १२ राशि में घटाने से शेष २।२१।३३।२६ बचा इसमें राशि का अंश बनाकर ३ से भाग देने से २७।११।८ यह सूर्य का उच्चबल हुआ शेषचक्र में स्पष्ट हैं। उच्चबलचक्र।
| सू. | चं. | म. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रह |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ° | ° | ° | ° | ° | ° | ° | अंश |
| २७ | ४३ | ५५ | ४६ | ४९ | ३८ | ५५ | कला |
| २१ | ३० | ८ | ४७ | ५२ | १९ | ४६ | विक |
| सप्तवर्गज बल साधन | |||||||
| मूलत्रिकोणस्वर्क्षाधिमित्रमित्रसमारिषु । | |||||||
| अधिशत्रुगृहे चापि स्थितानां क्रमशोबलम् ॥९॥ | |||||||
| भूताब्धयः खरामाश्च नखास्तिथिर्दिशो युगाः । | |||||||
| ग्रह अपने मूलत्रिकोण राशि में हो तो ४५, अपने राशि में हो तो ३०, अपने | |||||||
| अधिमित्र की राशि में हो तो २०, अपने मित्र की राशि में हो तो १५, सम की | |||||||
| राशि में हो १०, शत्रु की राशि में हो तो ४ और अधिशत्रु की राशि में हो तो | |||||||
| २ बल प्राप्त करता है॥९॥ स्पष्टार्थ चक्र को देखिये। | |||||||
| सप्तवर्गजबलचक्र। | |||||||
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रहाः |
| :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: |
| १५<br>० | १०<br>० | १०<br>० | २०<br>० | २०<br>० | १०<br>० | १०<br>० | ग्रहबल |
| २०<br>० | ३०<br>० | १०<br>० | २०<br>० | २०<br>० | १०<br>० | २<br>० | होराबल |
| १०<br>० | २<br>० | २<br>० | २९<br>० | ३०<br>० | २०<br>० | १०<br>० | द्रेष्काबल |
| १०<br>० | ४<br>० | ३०<br>० | ३०<br>० | १०<br>० | २०<br>० | १०<br>० | सप्तमांबल |
| २०<br>० | ४<br>० | १०<br>० | २०<br>० | २०<br>० | ३०<br>० | २<br>० | नवमांबल |
| २<br>० | १५<br>० | १०<br>० | २०<br>० | १५<br>० | २०<br>० | १५<br>० | द्वादशांबल |
| १५<br>० | २०<br>० | १०<br>० | १५<br>० | ३०<br>० | १५<br>० | १०<br>० | त्रिंशांशबल |
| ४३<br>० | ९५<br>० | ८२<br>० | १४५<br>० | १४५<br>० | १३५<br>० | ५९<br>० | वलैक्यबल. |