बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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अथ द्वितीयोऽध्यायः । ६१७
गेहाङ्गम्।
- लग्नम् (१०)
- द्वितीयम् (११) : मं.
- तृतीयम् (१२)
- चतुर्थम् (१)
- पञ्चमम् (२)
- षष्ठम् (३) : चं., शु.
- सप्तमम् (४) : सू.
- अष्टमम् (५) : बु., वृ.
- नवमम् (६)
- दशमम् (७)
- एकादशम् (८) : श.
- द्वादशम् (९)
होराङ्गम्।
- लग्नम् (५) : बु., मं., शु., वृ.
- द्वितीयम् (६)
- तृतीयम् (७)
- चतुर्थम् (८)
- पञ्चमम् (९)
- षष्ठम् (१०)
- सप्तमम् (११)
- अष्टमम् (१२)
- नवमम् (१)
- दशमम् (२)
- एकादशम् (३)
- द्वादशम् (४) : सू., चं., श.
द्रेष्काणाङ्गम्।
- लग्नम् (२)
- द्वितीयम् (३) : मं., शु.
- तृतीयम् (४)
- चतुर्थम् (५) : बु.
- पञ्चमम् (६)
- षष्ठम् (७) : सू.
- सप्तमम् (८) : श.
- अष्टमम् (९) : वृ.
- नवमम् (१०)
- दशमम् (११) : चं.
- एकादशम् (१२)
- द्वादशम् (१)
सप्तमांशांगम्।
- लग्नम् (८) : चं.
- द्वितीयम् (९)
- तृतीयम् (१०)
- चतुर्थम् (११)
- पञ्चमम् (१२)
- षष्ठम् (१) : मं.
- सप्तमम् (२) : श.
- अष्टमम् (३) : शु.
- नवमम् (४)
- दशमम् (५)
- एकादशम् (६) : बु.
- द्वादशम् (७) : वृ., सू.
नवमांशांगम्।
- लग्नम् (३)
- द्वितीयम् (४) : श., वृ.
- तृतीयम् (५)
- चतुर्थम् (६)
- पञ्चमम् (७) : शु.
- षष्ठम् (८)
- सप्तमम् (९)
- अष्टमम् (१०) : मं.
- नवमम् (११)
- दशमम् (१२) : सू.
- एकादशम् (१) : चं.
- द्वादशम् (२) : बु.
द्वादशांगम्।
- लग्नम् (६)
- द्वितीयम् (७) : बु.
- तृतीयम् (८)
- चतुर्थम् (९) : श.
- पञ्चमम् (१०) : सू., वृ.
- षष्ठम् (११)
- सप्तमम् (१२) : चं.
- अष्टमम् (१)
- नवमम् (२)
- दशमम् (३) : शु.
- एकादशम् (४) : मं.
- द्वादशम् (५)
त्रिंशांशांगम्।
- लग्नम् (१२)
- द्वितीयम् (१) : शु.
- तृतीयम् (२) : श., चं.
- चतुर्थम् (३) : सू.
- पञ्चमम् (४)
- षष्ठम् (५)
- सप्तमम् (६)
- अष्टमम् (७)
- नवमम् (८)
- दशमम् (९) : मं., वृ.
- एकादशम् (१०)
- द्वादशम् (११) : वृ.