बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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६२० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । नतोन्नतबल।
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रह |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ० | ० | ० | १ | ० | ० | ० | अंश |
| ३३ | २६ | २६ | ० | ३३ | ३३ | २६ | कला |
| ३५ | २७ | २७ | ० | ३५ | ३५ | २७ | विक. |
| पक्षबल- | |||||||
| दिवाबलमिति प्रोक्तं बलं नैशं ततोऽन्यथा । | |||||||
| षष्टिरेव सदाज्ञस्य चन्द्रादर्कं विशोध्य च ।।१६।। | |||||||
| अङ्गाधिके विशोध्यार्काद्भागीकृत्य त्रिभिर्भजेत् । | |||||||
| पक्षकंबलमिन्दुज्ञशुकार्याणां तु षष्ठितः ।।१७।। | |||||||
| चन्द्रमा में सूर्य को घटा दे यदि शेष ६ राशि से अधिक हो तो उसे १२ | |||||||
| में घटाकर शेष का अंश बनाकर ३ से भाग देने से लब्ध चन्द्र, बुध, शुक्र और | |||||||
| गुरु का पक्षबल होता है और इसे ६० में घटा देने से शेष ग्रह-सूर्य, भौम और | |||||||
| शनि का पक्षबल होता है।।१६-१७।। | |||||||
| उदाहरण- १।२२।३०।४७ में सूर्य २।१८।२६।३४ को घटाने से शेष | |||||||
| ११।४।४।१३ यह ६ राशि से अधिक है इसलिये इसे १२ में घटाकर शेष | |||||||
| ०।२५।५५।४७ में ३ का भाव देने से ०।३८।३५ यह चन्द्र, बुध, शुक्र और | |||||||
| गुरु का पक्षबल हुआ। इसे ६० में घटाने से शेष ०।२१।२५ यह सूर्य भौम शनि | |||||||
| का पक्षबल हुआ। पक्षबलचक्र। | |||||||
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रह |
| :-: | :-: | :-: | :-: | :-: | :-: | :-: | :-: |
| ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | अंश |
| २१ | ३८ | २१ | ३८ | ३८ | ३८ | २१ | कला |
| २५ | ३५ | २५ | ३५ | ३५ | ३५ | २५ | विक. |
| दिवारात्रित्रिभागबल- | |||||||
| हित्वामन्येषामहोमानं त्रिभागीकृत्य यत्र तु । | |||||||
| जन्मलग्नतदंशाधिपतेः षष्ठिबलं भवेत् ।।१८।। | |||||||
| आधाने चित्तप्रवेशे तु त्रिंशद्भूतार्णवा वलम् । | |||||||
| ज्ञार्कमन्देन्दुशुक्राराः पतयः सर्वदागुरुः ।।१९।। | |||||||
| अहोरात्र अर्थात् दिन और रात्रि का तीन-तीन भाग करने से ६ भाग होता | |||||||
| है इन ६ भागों के अधिपति क्रम से बुध, सूर्य, शनि, चन्द्र, शुक्र और भौम होते | |||||||
| हैं। अंशाधिपति अर्थात् जिस भाग में जन्मलग्न हो उसके स्वामी का ६० कला बल | |||||||
| होता है। गर्भाधान में ३० और चैतन्य प्रवेश में ४५ बल होता है और गुरु का |