भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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पृष्ठ 623

अथ द्वितीयोऽध्यायः । ६२१ सर्वदा १ अंश बल होता है, शेष चक्र से स्पष्ट है।।१८-१९।। दिवारात्रित्रिभागबलचक्र।

सू.चं.मं.बु.वृ.शु.श.ग्रह
अंश
कला
विक.
वर्षमासदिनहोरेशबल-
वर्षमासदिनेशानां तिथि स्त्रिंशच्छरार्णवाः ।
कालहोराधिपस्यैवं पूर्णं बलमुदाहृतम् ।।२०।।
वर्ष-मास, दिन के स्वामियों का क्रम से १५, ३०, ४५ बल होता है और
कालहोरेश का पूर्ण १ अंश बल होता है। पूर्व के सभी ४ बलों का योग करने
से कालवल होता है।।२०।।
वर्षेशादि साधन
शके १८७८ श्रावण कृष्ण १३ शनिवार को कलियुगादि अहर्गण साधन।
१८७८ + ३१७९ = ५०५७ गतकलिः
१२×
६०६८४ —मास
३ —गतमास
६०६८७
७०)६०६८७(८६६     ६०६८७     ६०६८७
५६०          ८६६      १८६५
---         -------      ------
४६८       ३३)६१५५३(१८६५   ६२५५२
४२०        ३३         ३०
---        ----       ---------
४८७        २८५      १८७६५६०
४२०        २६४        २७ गति
---        ----      ---------
६७        २१५      १८७६५८७
१९८        ×११
----      ---------
१७३    ७०३)२०६४२४५७(२९३६३
१६५      १४०६
---      -----
८      ६५८२
६३२७

२५५४ २१०९

४४५५ ४२१८

२३७७ २१०९

१८७६५८७              २६८ २९३६३

१८४७२२४ १

१८४७२२५ अहर्गणः।