भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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६२८ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । परन्तु यह उन्हीं भावों के स्वामियों के लिये हैं जिन पर बुध, गुरु की दृष्टि है।।३२।। विशेषसंस्कारः- गुरुंज्ञाभ्यां तु युक्तस्य पूर्णमेकं तु योजयेत् ।।३३।। मंदाररवियुक्तस्य बलमेकेन वर्जितम् । जिस भाव में गुरु और बुध होवें उस भावबल में १ जोड़ देना यदि शनि मंगल युत हों तो १ घटाने से भावफल होता है।।३३।। कालविशेषे बलाधिक्यता- दिवा शीर्षोदयाश्चैव संध्यामुभयोदयः ।।३४।। नक्तं पृष्ठोदयाश्चैव बलाधिक्यम् उदीरिताः । दिन में जन्म हो तो शीर्षोदय राशि के भाव अर्थात् मिथुन, तुला, सिंह, कन्या, वृश्चिक, कुम्भ के भाव बली होते हैं। संध्या समय में उभयादय मीन राशि बलवान् और रात्रि में मेष, वृष, कर्क, मकर और धन ये बलवान् होते हैं।।३४।। भानां दिग्बलम् - नृयुग्मजूकपाथोनचापपूर्वार्धकुंभभात् ।।३५।। भावबल विचार में यदि भाव में कन्या, मिथुन, तुला, कुम्भ और धन का पूर्वार्ध हो तो उसमें सप्तम भाव को ।।३५।। मृगचापपरार्धाख्यमेषसिंहवृषादपि । अलेः कर्कटकाच्चापि मृगांत्यार्धाच्चामीनभात् ।।३६।। यदि मकर का पूर्वार्ध और धन का उत्तरार्ध मेष, सिंह, वृष हो तो चतुर्थ भाव को, यदि वृश्चिक, कर्क हो तो उसमें लग्न को, यदि मकर का उत्तरार्ध और मीन हो तो उसमें दशम भाव को घटाकर।।३६।। अस्तं सुखं क्रमाल्लग्नं खं हित्वांगाधिके सति । चक्राद्विशोध्यरामैश्च भजेद्भागीकृतं बलात् ।।३७।। भावानां च ग्रहाणां च बलान्येवं विदुर्बुधाः । शेष ६ राशि से अधिक हों तो उसे १२ में घटाकर शेष का अंश बनाकर उसमें ३ से भाग देने से लब्धि भावबल होता है।।३७।। इस प्रकार भाव ग्रहों का बल पण्डितों ने कहा है।