बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ लोकयात्राप्रकरणम् । ६४५ त्रिकोणशोधन- अष्टकवर्ग शोधन की दो विधियाँ हैं। १. त्रिकोणशोधन, २. एकाधिपत्य शोधन। प्रथम त्रिकोण शोधन क्या है? सम्पूर्ण राशि चक्र में ४ त्रिकोण हैं। त्रिकोण से तात्पर्य प्रथम, पंचम और नवम राशि से है अतः प्रत्येक त्रिकोण की प्रथम राशि क्रमशः मेष, वृष, मिथुन और कर्क है। इसका प्रयोजन अष्टकवर्गाध्याय के श्लोक सं. ७५ में कहा हुआ है। अथ पिंडोत्पत्तिः- शोध्यावशेषं संस्थाप्य राशिमानेन वर्द्धयेत् । ग्रहयुक्तेऽपि तद्राशौ ग्रहमानेन वर्द्धयेत् ।।९।। एकाधिपत्य शोधन करने से जो अंक जिस राशि के नीचे हों उन्हें उन-उन राशि के गुणकांकों से गुणा कर उसके नीचे रख दे इसके बाद उनका योग करने से राशि पिंड होता है। इसी प्रकार जिस राशि में जो ग्रह हो उस ग्रह के गुणकांक से एकाधिपत्य शोधन से शेष अंक को गुणा कर रख दे और सबका योग करने से ग्रहपिंड होता है। उदाहरण चक्रों में है। राशिगुणकांक- गोसिंहौ दशगुणितौ वसुभिर्मिथुनालिगौ । वणिग्मेषौ तु मुनिभिः कन्यकामकरौ शरैः शेषाः स्वमानगुणिता राशिमाना इभेक्रमात् ।।१०।। ग्रहगुणकांक- जीवारशुक्रसौम्यानां दशवसुमुनीन्द्रियैः । बुधस्य संख्या शेषाणां ग्रहंगुणयेत्पृथक् ।।११।। त्रिषुद्वयोर्वा यन्न्यूनमितरत्रसमं भवेत् । एकस्मिन् भवने शून्ये तत्रिकोणं न शोधयेत् ।।१२।। समत्वे सर्वगेहेषु सर्वं शोधयेद्बुधः । त्रिकोण के तीन राशियों में से जिस राशि की रेखा संख्या अल्प हो उसे त्रिकोण की अन्य दो राशि की संख्या में से घटाकर शेष को उसी राशि के नीचे रखे अल्प रेखा संख्या के स्थान में शून्य रखना चाहिये। यदि त्रिकोण की तीनों राशियों में से किसी एक राशि में शून्य हो तो अन्य दो राशियों के नीचे वैसी रेखा स्थापित कर दें अर्थात् उनका त्रिकोण शोधन न करे।।१२।।