बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६४६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । यदि त्रिकोण के तीनों राशियों की रेखायें तुल्य हों तो सभी का संशोधन करे अर्थात् तीनों के नीचे शून्य रखे। एकाधिपत्यशोधन- क्षीणेन सह चान्यस्मिन् शोधयेत् ग्रहवर्जितः ।।९३।। ग्रहयुक्ते फले हीने ग्रहाभावे फलाधिके । अनेन सह चान्यस्मिन् शोधयेद् ग्रहवर्जिते ।।९४।। फलाधिके ग्रहैर्युक्ते चान्यस्मिन् सर्वमुत्सृजेत् । उभयोर्ग्रहसंयुक्ते न संशोध्यः कदाचन ।।९५।। उभयोर्ग्रहहीनाभ्यां समत्वे सकलं त्यजेत् । सग्रहा ग्रहतुल्यत्वात्सर्वं संशोध्यमग्रहात् ।।९६।। एकत्र नास्ति चेत्सर्वहानिरन्यत्र कीर्त्तिताः । कुलीरसिंहयो राश्योः पृथक् क्षेत्रं पृथक् फलम् ।।९७।। १—भौमादि पंचग्रहों की दो दो राशियाँ होती हैं अतः इन्हीं का एकाधिपत्य शोधन होता है जिसका नियम यह हैं— यदि दोनों राशियों में कोई ग्रह न हो तो अल्पसंख्या को अधिक संख्या में घटाकर शेष को अधिक संख्या के नीचे रख दे और अल्पसंख्या को ज्यों का त्यों रख देना चाहिये। २—यदि एक राशि में ग्रह हो और दूसरी राशि में ग्रह न हो और ग्रहहीन राशि के संख्या से ग्रहयुक्त राशि की संख्या अल्प हो तो ग्रहहीन राशि संख्या में से प्रहयुक्त राशि की संख्या को घटाकर शेष को ग्रहहीन राशि के नीचे रखना और ग्रहयुक्त राशि की संख्या वैसी ही रख देना। ३—यदि ग्रहयुक्त राशि की संख्या ग्रहहीन राशि के संख्या से अधिक हो तो ग्रहंयुक्त राशि की संख्या वैसी ही रहेगी और ग्रहहीन राशि के नीचे शून्य रखना चाहिये। ४—यदि दोनों राशि ग्रहयुक्त हों तो संशोधन नहीं करना चाहिये अर्थात् जैसे का तैसा ही रखना चाहिये। यदि दोनों राशियों में ग्रह न हो और संख्या भी तुल्य हो तो दोनों राशियों में शून्य रखना चाहिये। ५. यदि एक सग्रह हो और दूसरी राशि ग्रहहीन हो और संख्या भी समान हो तो ग्रहहीन राशि की संख्या के स्थान में शून्य और ग्रह युक्त राशि की संख्या