बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
पृष्ठ 649, कुल 800 में से
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अथ लोकयात्राप्रकरणम् । ६४७ वैसी ही रहेगी। ६- यदि दोनों ग्रहयुक्त या ग्रहहीन हों अथवा दोनों में एक ग्रहयुक्त और ग्रहहीन हो और त्रिकोणशोधन के बाद किसी एक में शून्य संख्या हो तो दोनों में शून्य ही रहेगा। ७- कर्क और सिंह राशि के स्वामी चंद्र और सूर्य के अलग-अलग होने के कारण इनका एकाधिपत्य शोधन नहीं करना चाहिये। विशेष- त्रिकोणशोधन के उपरान्त ही उपर्युक्त ७ विकल्पों से एकाधिपत्य शोधन करना चाहिये। शेष उदाहरण चक्र से स्पष्ट है। सूर्याष्टकवर्ग शोधन।
| ग्रह | सू. | बु. बृ. | श. | मं. | : | शु. चं. | योग | योगापिंड | |||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| राशि | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १ | २ |
| रेखा | ३ | ४ | २ | ४ | ६ | ५ | ४ | ३ | ३ | ५ | ५ |
| त्रि.शो. | ० | ० | ० | १ | ३ | १ | २ | ० | ० | ० | ३ |
| एका.शो. | ० | ० | ० | १ | ० | ० | ० | ० | ० | ० | २ |
| रा.गु. | ० | ० | ० | ७ | ० | ० | ० | ० | ० | ० | १० |
| ग्रं.गु. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० |
| चंद्राष्टकवर्गशोधन। | |||||||||||
| ग्रह | चं. शु. | सू. | बु. बृ. | श. | मं. | योग | योगपिंड | ||||
| :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- |
| राशि | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १ |
| रेखा | ५ | २ | ४ | ३ | ४ | ५ | ५ | २ | ४ | ७ | ५ |
| त्रि.शो. | १ | ० | ० | १ | ० | ३ | १ | ० | ० | ५ | १ |
| एका.शो. | १ | ० | ० | ० | ० | ३ | १ | ० | ० | ४ | ० |
| रा.गु. | ८ | २४ | |||||||||
| ग्र.गु. | १२ | १५ | |||||||||