भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथ सप्तमोऽध्यायः । . ६७३ तदंशकालस्यांते वाप्यादावंत्यांशकेऽपि च । धृत्यांशकेऽपि फलदाः पाचकाद्याः क्रमादिह ।।२३।। ये पाचक बोधक कारक और वेधक ग्रह अन्तिम नवमांश में वा प्रथम तथा अन्तिम नवांश में भी फल देते हैं।।२३।। सूर्यादि ग्रहाणां गोचरे फलकालः। आदौ फलप्रदौ भौमरवी मध्ये सितार्यकौ । सर्वदाज्ञः शशी मंदस्त्ववसाने फलप्रदौ ।।२४।। भौम और सूर्य राशि के आदि में, शुक्र और गुरु राशि के मध्य में बुध सर्वदा और चंद्र शनि राशि के अन्त में फल देनेवाला होता है।।२४।। इति पाराशर होरायामुत्तरार्धे लोकयात्राध्याये प्रकीर्णकाध्यायः षष्ठः।।६।। अथ सप्तमोऽध्यायः भावफलानामवधिः। धनहानिभयानां च व्याधीनां दिवसास्तथा । शुभाशुभानि कर्माणि यात्रादि विजयादि च ।।१।। धन की प्राप्ति और हानि, शत्रु भय और रोग की प्राप्ति का दिन, और शुभ अशुभ कर्म जय पराजय और उत्कर्ष इनका निर्णय।।१।। मासचर्या विधानेन ब्रूयादन्येन चैतरान् । लग्णारिमृतिरिःफेषु कर्मणां च पतींस्तथा ।।२।। मासचर्या के अनुसार करना चाहिये, इससे भिन्न कार्यों को दिन और वर्ष चर्या के अनुसार करना चाहिये। इसमें भी १।६।८।१२ भावों के स्वामी और बिन्दु के स्वामियों का विचार करना चाहिये।।२।। करणेशान्समालोच्य कथयेन्सुनिपुंगव । रंसेषवोमुनिः खाष्टो रविभूपा दिशस्तथा ।।३।। सूर्य का ५६ दिन चन्द्र का ७ दिन, भौम का ८० दिन, बुध का १२ दिन, गुरु का १६ दिन शुक्र का १० दिन।।३।। द्विशतं च क्रमात्सूर्याद्दिवासान्नाष्टमे स्थिताः । द्वितीयेऽर्धं त्वंतरे च त्रैराशिकवशेन तु ।।४।।