बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 694, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें, it is printed: द्वात्रिंशद्भेद्भिन्नोऽयमायुषो निर्णयः कृतः ।
L23: लोकयात्रा परिज्ञानहेतवे दायनिर्णयः ।।२००।।
L24: हे मैत्रेय! मैंने लोक के सुख दुख को जानने के लिये ३२ भेद से युक्त आयु
L25: का निर्णय कहा।।२००।।
L26: भावानां संप्रवक्ष्यामि शृणुष्वः मुनिपुंगवः । Wait, look at "शृणुष्वः": शृ - णु - ष्व - ः Yes, there is a visarga! Then: मुनिपुंगवः ।
L27: आयुञ्च परमं हत्वा स्वेन स्वेन बलेन च ।।२०१।। Wait, "आयुञ्च": आ - यु - ञ्च Yes, ञ्च (nya + ca). "हत्वा": ह - त्वा (not हृत्वा, standard हत्वा). "स्वेन स्वेन बलेन च ।।२०१।।"
L28: इन ३२ प्रकारों के बाद आठवां भावों का आयुर्दाय कहता हूँ। पूर्वोक्त सात
L29: प्रकार के आयुर्दाय में से किसी एक को लेकर उसे अपने-अपने भावबल से
L30: गुणाकर।।२०१।।
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