बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६९४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । मिश्रायुर्दायक्रमः- लाभे रवीन्द्वोरबुधेज्यशुक्रमंदाः स्थिताः प्रक्रमदाय एव । लग्नार्यभौमज्ञरवीन्दुमंद शुक्रास्तृतीये सुतभे च धर्मे ।।९३।। स्वे शुक्रमंदार्यवुधार्कभौमचंद्राः सुखेऽस्तेनिधनेऽपिचैव । बुधात्क्रमात् व्युत्क्रमतश्च चंद्राद्भौमार्कमंदार्यसितज्ञचंद्राः ।।९४।। एकादश भाव में सूर्य, चन्द्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि ये मिश्रायु देनेवाले होते हैं। लग्न, तृतीय, पंचम और नवम भाव में क्रम से गुरु, भौम, बुध, सूर्य, चन्द्र, शनि, शुक्र आयु दायक, दूसरे घर में शुक्र, शनि, गुरु, बुध, सूर्य, भौम, चंद्र आयुदायक चौथे भाव में बुध, सूर्य, भौम, चंद्र, शुक्र, शनि, गुरु आयुर्दायक, सप्तम में चंद्र, भौम, सूर्य, बुध, गुरु, शनि, शुक्र आयु दायक, आठवें भाव में भौम, सूर्य, शनि, गुरु, शुक्र, बुध, चंद्र आयु दायक ।।९४।। षष्ठे व्यये कर्मणि लाभगा वा रवान्दुशुक्रार्किकुजार्यसौम्याः । सौम्यात्कुजाद्भार्गवतः क्रमात्स्युर्मिश्रेतु दाये क्रमशः प्रदिष्टम् ।।९५।। षष्ठ भाव में सूर्य, चंद्र, शुक्र, शनि, भौम, गुरु, बुध आयु दायक। १२ वें भाव में बुध, सूर्य, चंद्र, शुक्र, शनि, भौम, गुरु आयुर्दायक, १० वें भाव में भौम, बुध, गुरु, बुध, सूर्य, चंद्र, शुक्र, शनि आयुर्दायक, ११ वें भाव में शुक्र, शनि, भौम, गुरु, बुध, सूर्य, चंद्र आयुदायक होते हैं।।९५।। आयुर्दायस्यसंख्या- नक्षत्रदायोऽशकपिंडदायो भिन्नाष्टवर्गः समुदाय संज्ञः । स्वरांशदायौ क्रमशः प्रदिष्टौ विशेषतस्तत्रवदामि सम्यक् ।।९६।। नक्षत्राायु, अंशायु, पिंडांयु, भिन्नाष्टकवर्गायु, समुदायाष्टकवर्गायु, शतस्वरांशायु, स्वरांशायु और नवमांशाय ये आयुर्दाय के प्रकार हैं। इनमें किस आयु के कितने भेद हैं उसको विशेष रुप से कह रहा हूँ।।९६।। अमिश्रायुषोभेदः- अष्ट त्रिंशदमिश्रेतु अंकसूर्यकलांशकैः । मूर्छाक्षिणी भिदाः संति रश्मिजास्त्रिंशदेवहि ।।९७।। अमिश्रायु के ३८ भेद होते हैं उसमें भी नवमांश, द्वादशांश और षोडशांश के भेद से २२१ भेद होते हैं उसमें भी नवमांश, द्वादशांश और षोडशांश के भेद से २२१ भेद होते हैं। रश्मिजायु के ३० भेद होते हैं।।९७।।