भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 714

७०२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । धननाशो भवेद्युद्धे पराजय पराभवौ । काक्षांशांश्रार्ध होरांश फलानि क्रमशःस्थिते ।।१८।। युद्ध में धन की हानि, पराजय और पराभव होता है ।।१८।। भौमस्यफलम् - स्वर्णसिद्धिर्जयो वस्त्रलाभो मित्रसमागमः । विवादो भ्रातृभिः शत्रुकर्म स्त्रीचंचलाक्षकः ।।१९।। यदि मंगल अपने उच्च का हो सुवर्ण की सिद्धि, विजय, वस्त्र का लाभ, मित्र समागम, बंधुविवाद, शत्रुकर्म स्त्री विषय में चंचल नेत्र ।।१९।। स्त्रीलाभो दासलाभश्च कृत्स्नेहा च वलक्षयः । वलैर्धनायतिः स्वोच्चे क्षेत्राद्यैर्न्यायतो भवेत् ।।२०।। स्त्री लाभ, दास का लाभ, सभी इच्छाओं की पूर्ति, बल की हानि, बल से धन का लाभ होता है ।।२०।। मूलत्रिकोणे क्षेत्रेण राज्ञो वाथ धनायतिः । स्वर्क्षे वस्त्रं कांचनादि सिद्धिंश्चाथ सुहृत्फलम् ।।२१।। मूल त्रिकोण राशि का हो तो कृषि कर्म या राजा के आश्रय से धन का लाभ होता है। स्वराशि का भाग्य भाव में हो तो वस्त्र सुवर्णादि का लाभ होता है, मित्र राशि का हो तो धान्य लाभ होता है ।।२१।। धान्यायतिंश्च मैत्री च क्रूरकर्म प्रवर्तनम् । कुष्ठं चाप्यग्निभीतिंश्च गृहदाहोऽतिशत्रुभे ।।२२।। अधिशत्रु की राशि का हो तो क्रूरकर्म में प्रवृत्ति होती है, अग्निभय, कुष्ठ, सग्रहणी गुल्म आदि रोग के कारण धन हानि होती है ।।२२।। बुधस्यफलम् - संग्रहणीगुल्मरोगश्च धननांशंश्च तत्र तु । विद्यार्जने सुखं स्त्रीभिः कलहश्च धनायतिः ।।२३।। बुध अपनी उच्चराशि का होकर भाग्य भाव में हो तो विद्या-संपादन और सुख प्राप्ति में लाभ होता है। शत्रु राशि का हो तो स्त्री से कलह, मित्र राशि का हो तो धन का लाभ ।।२३।।