भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 736

७२४. बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । क्षेत्रेश २१, गरुड़ २२, स्कंद २३, शान्ता २४, ब्रह्मा २५, ईश्वर २६, गरुड़ २७, जिन २८, बौद्ध २९, सभी में समान भक्ति होती है।।१२०।। अथ मरण निमित्तानि- ज्वरश्लेष्मातिसारासृग्जठरव्याधिमूलरुक् । मेहग्रहणिपिटिका पावकावनिशस्त्रतः ॥१२१॥ सूर्यादि १४ ग्रहों में से जन्म राशि में जो हो वा जिसका अंश हो उसके निमित्त से मृत्यु कहना चाहिये। जैसे ज्वर १, कफ २, अतिसार ३, रक्तविकार ४, जठर (पेट) व्याधि ५, मूलव्याधि ६, प्रमेह ७, संग्रहणी ८, पिटकरोग ९, अग्नि १०, भू ११, शस्त्र १२॥१२१॥ दाहज्वरविषाभ्यां तु सूर्यात्कालांतिमेमृतिः । राशौ ग्रहांशके पित्तवातश्लेष्मनरोगतः ।।१२२।। पित्तवातकफश्लेष्मपित्तवातैः क्रमात्स्मृतः । दाह १३, ज्वर विष निमित्त से मृत्यु कहना। प्रकारांतर से सूर्य से पित्त, चन्द्र से वायु, भौम से कफ, बुध से पित्त, गुरु से वायु, शुक्र से कफ, शनि से कफ, राहु से पित्त, केतु से वायु से मृत्यु होती है।।१२२।। नवांश द्वारा मरण निमित्तानि- ज्वरसन्निपातजठरामयांत्ररुग्रामप्रमेहजलाज्जलाग्नितः । ज्वरसन्निपाततोत्रभवेन्मृतिः क्रिय पूर्व कस्तुनिधनांशकेष्वितु ।।१२३।। मेषादि राशियों में मरण कालीन नवांशों के निमित्त क्रम से ज्वर १ सन्निपातज्वर २, जठर (पेट) के रोग ३, अंत्ररोग ४, प्रमेह ५, जल से ६, अग्नि से ७, ज्वर से ९ मृत्यु कहना। यह जन्म लग्न के नवांश से देखना चाहिये।।१२३।। राशिनिमित्ततो मृत्युविचारः- गुल्मोदरज्वरविषाग्निजलादिपातगुदकलभगंदरोत्था । रक्तातिसारजठरज्वरमेहगुल्मकुष्ठातिसारपिटकादि- भिरश्मरीयैः ।।१२४।। मेषादि राशियों में क्रम से गुल्म १, उदरज्वर २, विष, अग्नि से ३, शस्त्रादि से ४, भगंदर से ५, रक्तातिसार, जठर रोग से प्रमेह-गुल्म से ७, कुष्ठ अतिसार से ८, पिटक रोग से ९।।१२४।।