भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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पृष्ठ 738

७२६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । रश्मिवर्षहारज्ञानायचक्रम् –

र.१०१११२१३१४१५१६१७१८१९२०
व.५०५०५०५०६०५५६८४९७५७५८०७०५०४०
हा.७३५४१०
हा.१२१२१२१२१०११
रं.२१२२२३२४२५२६२७२८२९३०
व.७४७४६०७८५८७५७७८१८५४०
हा.१११०१२
अथ अंशायुहारः-
रुद्रा दिङ्नवतर्काकी अंकहाराः क्रमादमी ।
रुद्रार्कमनुविश्वेऽष्टिः सप्तांकेष्वर्कदिक्छराः ।।१३३।।
११।२३।१४।१३।१६।७।५९।१२।१०।५।५४।९०। ये ये अंशायुर्दाय
के हार हैं।।१३३।।
राशीनामशायुर्दाये हारः-
वेदेषुवेदकांशाःस्युरंशहारा प्रकीर्तिताः ।
पंचानां च चतुर्णां च तत्तत्षण्णवतिःशतम् ।।१३४।।
५।४।६।९०।१०० ।।१३४।।
दशरुद्रानखामूर्छा हाराःस्युःक्रमशःस्मृताः ।
शते रसार्कुरुद्राश्च दशविंशोत्तरं शतम् ।।१३५।।
१०।११।२०।२१ ये क्रम से नवांशायुर्दाय के हार हैं शतायुर्दाय के क्रम
से ६।१२।११।१०।१२० हार होते हैं।।१३५।।
एते हाराःक्रमात्प्रोक्ताःकेषांचित्परमायुषः ।
केषांचिदनयोर्योगदलमाब्दाः षिशेषतः ।।१३६।।
किसी के मत से हार शतायु के योग का करना वही वर्ष होता है।।१३६।।
अथ पूर्वोक्तानां फल विचारः-
दशमं यावदायातःस्वकुटुम्बं विभर्त्ति च ।
कृच्छ्रेण दशमे पुत्रबाहुल्यानेकसंयुतः ।।१३७।।