भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथ चतुर्दशोऽध्यायः । ७२७ यदि दश पर्यन्त रश्मि योग हो तो कष्ट से कुटुम्ब का भरण पोषण करे, यदि दश रश्मि योग हो तो अधिक पुत्र हों।।१३७।। एकादशे तु विद्वांसी निर्धनो जगती सदा । अरंति द्वादशे नित्यं निर्धनाःकुलपांशवाः ।।१३८।। ग्यारह रश्मि हो तो पुत्र विद्वान् निर्धनता के कारण पृथ्वी पर घूमता रहे, १२ रश्मि हो तो निर्धन, कुलाधम और नीच हो।।१३८।। स्वदेहार्थधना दासा अतो यावत्तु विंशतिः । अतः परं मृतिं याता वाल्ये एव यथागताः ।।१३९।। तेरह रश्मि हो तो शरीर के रक्षार्थ धन पैदा करने वाला, नौकरी करने वाला और कितनों की वाल्यकाल में ही मृत्यु हो जाती है।।१३९।। अथ योगज्ञानम् - एवं प्राग्वत्सराः प्रोक्ताः प्रथमेचोत्तरेस्मृताः ।।१४०।। केन्द्रत्रिकोणेष््वशुभाः ग्रहास्तु त्रिलाभषष्ठा