बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ वर्षचर्यादिफलाध्यायः । ७३१ वेश्यासक्तस्तृतीये स्यान्निर्धनः कुलपांशनः । मृतपुत्रोऽथवाऽभाग्यश्चतुर्थे स्त्रीविमानितः ॥५॥ तीसरे अंश में निर्धन और कुलहीन होता है। अथवा मृत्यु मृतपुत्र वाला भाग्यहीन होता है। चौथे अंश में स्त्री से पराजित हो॥५॥ पंचमेत्वल्पपुत्रः स्यात्षष्ठे चाप्यरुजा युतः । स्त्रीयोगे धनवान्कश्चित्सप्तमे दुःखितोऽधनः ॥६॥ पांचवें अंश में अल्पपुत्र छठें अंश में रोग रहित हो, स्त्री के योग से धनी हो, सातवें अंश में दुःखी और निर्धन हो॥६॥ आद्येंऽशे द्वादशेरश्मौ नैव तस्य शुभाशुभौ । द्वितीये बलवान्मूर्खश्चौर्यद्रव्येण जीवति ॥७॥ बारहवें रश्मि के प्रथमांश में जन्म हो तो शुभ अशुभ समान हो, दूसरे अंश में बलवान, मूर्ख चोर हो॥७॥ तृतीये च चतुर्थे च वेश्यापतिररिंदमः । नृपपुरुष मृत्युश्च भार्याहीनोऽसुतोऽधनी ॥८॥ तीसरे तथा चौथे अंश में वेश्यापति हो और शत्रु का नाश करने वाला राजपुरुष के हाथ से मृत्यु हो और यदि जीवे तो स्त्रीहीन, पुत्रहीन और धनहीन हो॥८॥ विद्वांश्चतुर्दशे त्वाद्ये पितृभ्यांलालितः सुखी । द्वितीये क्लेशभाग्वापि शत्रुजिच्च रणाजिरे ॥९॥ पितृभ्यां हीन एवाथ लब्धकिंचिद्धनार्जकः । देशाद्देशागऽत्येव तृतीये धनतत्परः ॥९-१०॥ चौदहवीं रश्मि के प्रथम अंश में जन्म हो तो विद्वान हो, दूसरे अंश में माता पिता से ललित और सुखी, तीसरे अंश में क्लेशयुक्त, शत्रु को जीतने वाला मातृ- पितृ हीन हो और भ्रमणशील हो॥१०॥ सद्भिरेड्यः सुखी ख्यातः शांतबुद्धिररिंदमः । चतुर्थे धनवान् क्षेत्री विद्यार्जितपोषकः ॥११॥ चौथे अंश में धनी, सुखी, प्रसिद्ध, शांतबुद्धि, शत्रुनाशक, स्तुत्य, पांचवें अंश में धनी, भूमि युक्त विद्या से जीविका करने वाला॥११॥ सती स्त्रीयोगसंयुक्तः पंचमेदुःखभाग्धनी । पुत्रादिसंपत्संयुक्तः एवं पंचदशे भवेत् ॥१२॥