भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 80

८२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अपने होरा में सूर्य नवम भाव में हो, सातवें भाव में शनि हो और ग्यारहवें भाव में गुरु-शुक्र हों तो १ मास में बालक की मृत्यु होती है।।९।। व्यये सर्वे ग्रहा नेष्टा सूर्यशुकेन्द्रराहवः। विशेषात्राशकर्त्तारो दृष्ट्या वा भङ्गकारिणः।।१०।। १२वें भाव में सभी ग्रह अशुभ होते हैं, विशेषकर सूर्य, शुक्र, चन्द्रमा और राहु। इनकी दृष्टि भी हानिकर होती है।।१०।। पापान्वितः शशी धर्मे द्यूनलग्नगतो यदि। शुभैरवीक्षितयुतस्तदा मृत्युप्रदः शिशोः।।११।। पापग्रह से युत चन्द्रमा ९वें या ७वें भाव में हो और शुभग्रह से दृष्ट- युत न हो तो बालक की मृत्यु होती है।।११।। सन्ध्यायां चन्द्रहोरायां गण्डान्ते निधनाय वै। प्रत्येकं चन्द्रपापैश्च केन्द्रगैः स्याद्दिनाशनम् ।।१२।। प्रातः संध्या या सायं संध्या में चन्द्रमा की होरा में जन्म हो और गंडात हो तो बालक की मृत्यु होती है। प्रत्येक केन्द्रों में पापग्रह चन्द्रमा से युत हो तो भी मृत्यु होती है।।१२।। रवेस्तु मण्डलार्द्धास्तात्सायं सन्ध्या त्रिनाडिका। तथैवार्द्धोदयात्पूर्वं प्रातः सन्ध्या त्रिनाडिका ।।१३।। सूर्यबिंब के आधा अस्त हो जाने के बाद ३ दंड सायं संध्या और सूर्यबिंब के आधा उदय होने के पश्चात् ३ घटी प्रातः संध्या होती है। ।१३ ।। चक्रपूर्वापरार्धेषु क्रूरसौम्येषु कीटभे। लग्नगे निधनं यान्ति नात्र कार्या विचारणा ।।१४।। यदि सभी पापग्रह चक्र के पूर्वार्ध में हों और परार्ध में शुभग्रह हों और कीटलग्न (कर्कराशि) जन्मलग्न हो तो बालक की मृत्यु होती है।।१४।। व्ययशत्रुगतैः क्रूरैर्मृत्युद्रव्यगतैरपिं। पापमध्यगते लग्ने सत्यमेव मृतिं वदेत् ।।१५।। यदि १२वें, छठे, ८वें और दूसरे भाव में पापग्रह हों, जन्मलग्न पापग्रह के मध्य में हो तो बालक की मृत्यु होती है।।१५।।