भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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८४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ मातृकष्टम्- चन्द्रमा यदि पापानां त्रितयेन प्रदृश्यते। मातृनाशो भवेत्तस्य शुभदृष्टे शुभं भवेत्।।२३।। यदि जन्म समय चन्द्रमा को तीन पापग्रह देखते हों तो माता की मृत्यु होती है। शुभग्रह देखते हों तो शुभ होता है।।२३।। धने राहुर्बुधः शुक्रः सौरिः सूर्यो यथास्थितः। यस्य मातुः भवेन्मृत्युर्मृते पितरि जायते।।२४।। धन भाव में राहु, बुध, शुक्र, शनि और सूर्य हों तो उसके पिता के मरने के बाद माता की मृत्यु होती है।।२४।। पापात्सप्तमरन्ध्रस्थे चन्द्रे पापसमन्विते। बलिभिः पापकैर्दृष्टे जातो भवति मातृहा।।२५।। पापग्रह से सातवें, आठवें भाव में पापग्रह से युत चन्द्रमा हो, बलवान् पापग्रहों से देखा जाता हो तो उसकी माता की मृत्यु होती है।।२५।। उच्चस्थो वाथ नीचस्थः सप्तमस्थो यदा रविः। मातृहीनो भवेद्बालः अजाक्षीरेण जीवति।।२६।। जिसके जन्म समय में लग्न में सातवें भाव में उच्चराशि में या नीच राशि में सूर्य हो तो उसके माता की मृत्यु होती है और वह बालक बकरी के दूध से जीता है।।२६।। चन्द्राच्चतुर्थगः पापो रिपुक्षेत्रे यदा भवेत्। तदा मातृवधं कुर्यात्केन्द्रे यदि शुभो न चेत्।।२७।। यदि अपने शत्रु की राशि का पापग्रह चन्द्रमा से चौथे हो और केन्द्र में शुभग्रह न हों तो माता की मृत्यु होती है।।२७।। द्वादशे रिपुभावे च यदा पापग्रहो भवेत्। तदा मातृवधं विन्द्याच्चतुर्थे दशमे पितुः।।२८।। जन्मलग्न से १२ वें, छठे स्थान में पापग्रह हों तो माता का विनाश होता है। चौथे, दशवें स्थान में पापग्रह हो तो पिता की हानि होती है।।२८।। लाभे क्रूरो व्यये क्रूरो धने सौम्यस्तथैव च। सप्तमे भवने क्रूरः परिवारक्षयङ्करः।।२९।।