बृहत्संहिता (आचार्य वराहमिहिर - स्थापत्य, खगोल, मौसम व जल विज्ञान)
Brihat Samhita of Varahamihira with Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर / डॉ. सुरेशचन्द्र शास्त्री द्वारा
804 बृहत्संहितायाम् [Adh. CVII. Sl. 13-14. Sloka 12.—The next (97) chapter treats of the time of fruition of effects; the next (98), of the func- tions and qualities of the asterisms; the next (99), of func- tions and properties of the Tithies; and the next (100), of the qualities of the Karanas; the next, of the effects of birth in the several asterisms; the next (104), of the transits of planets; and the last, the worship of the stellar deity. शतमिदमध्यायानामनुपरिपाटिक्रमानुक्रान्तम् । अत्र श्लोकसहस्राण्याबद्धान्यूनचत्वारि ॥१३॥ Sloka 13.—Thus have the above one hundred chap- ters been listed in regular order and verses equivalent to 3900 ones of the Sloka metre have been composed in this work. The commentator says that this number does not include the verses of chapters on वातचक्र, अङ्गविद्या, पिटकलक्षण, अश्वलक्षण, and गजलक्षण. They being included, it will be 4000 verses. अत्रैवान्तर्भूतं परिशेषं निगादितं च यात्रायाम् । बह्वाश्चर्यं जातकमुक्तं करणं च बहुचोद्यम् ॥१४॥ Sloka 14.—This work contains matters relating to journey (यात्रा); the work bearing that name gives fuller details that are not mentioned here. I have already written the Brihat Jataka, containing very many wonderful mate- rials, also the Karana (पञ्चसिद्धान्तिका) which has been en- logised by many. Thus ends the 107th Adhyaya on the "Table of Contents in this science. ꧁ स्वस्ति श्रीः ꧂
श्लोकानुक्रमणी ❖❖❖❖❖ अ Adhyaya Sloka Adhyaya Sloka अकलुषांशु viii 53 अण्डजहारविजो x 20 अकारणे क्रोशति xcii 2 अण्डीरकष्ठीति lxxxviii 26 अक्षोभः श्रवणं xc 9 अतसीकुसुमश्यामं lxxxi 7 अग्नयः पितरस्तारा xlviii 69 अतसीकुसुमश्यामः lviii 32 अग्निप्रकृत्या lxviii 110 अतसीवे xxix 6 अग्निभयं च lxxxvii 31 अतिकृश lxviii 51 अग्रतः पृष्ठतो xxviii 22 अतिमुक्त xxix 5 अङ्गारगौरि xlvi 78 अतिवृद्धिः xlvi 34 अङ्गारे स्तेन liii 61 अतिवृष्ट्यु xlii 1 अङ्गिरसो xiii 10 अतीवह्रेषन्ति xciii 11 अङ्गुलशतार्ध l 1 अतृणेसतृणा liv 52 अङ्गुलानि lxix 18 अत्यम्लतिक्त lxxvi 12 अङ्गुष्ठकेन liii 99 अत्यन्तविरुद्धानां xcvii 12 अङ्गुष्ठनखः lviii 20 अत्युत्तमोत्तमाने ix 9 अङ्गुष्ठमूले lxx 14 अत्युल्बण lxxvii 15 अङ्गुष्ठयवै lxviii 42 अत्रसहस्र lxxvii 17 अङ्गुष्ठेन li 37 अत्राक्रान्ते ix 17 अच्छिद्रः xlvii 23 अत्रारोहेच्छलिक ix 21 अच्छिद्रमवनि xxxv 3 अत्रारोहेद्रविडा ix 19 अच्छिद्ररज्जुं xliii 58 अत्रैवान्त cvii 14 अजात शाखान् lv 5 अत्रोदित ix 11 अजोऽव्ययः xliii 54 अथ च चतुर्भुज lviii 34 अञ्जनभृङ्ग lxiv 2 अथ तु भुजगेन्द्र v 6 अञ्जनमुस्तो liy 121 अथ दक्षिणेन xiv 11 अज्ञातपूर्वाणि lxxxv 2 अथ पश्चिमे lxxxvii 33 अणुरपडु xix 22 अथ पाशर्वादीनां liii 15
2 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka अथ पूर्वस्यां xiv 5 | अन्धत्वमूर्च्छे lviii 52 अथ मधुर xlv 4 | अङ्गं जगतः xxi 1 अथवा कुशमपि cvi 3 | अन्नैः क्षीरघृतोत्कटैः cv 8 अथवाञ्जन xxiv 16 | अन्यजन्मान्तर lxxxvi 5 अथवा समुद्रतीरे xlviii 12 | अन्यप्रतिरुता xc 8 अथवा स्पृशति l 10 | अन्यत्तौ xlvi 40 अथाङ्गान्यूर्वोष्ठ li 8 | अन्यानपि xi 36 अथाप्रशस्ताः lxv 10 | अन्येन lxxix 15 अधिराज्या xlviii 85 | अन्येनात्राक्रान्ते ix 13 अध्यक्षाधिकृतानां liii 9 | अन्येषांतु lxxiii 6 अध्यर्धहस्त lxxii 3 | अन्येषामुष्णान्नं lxxiii 5 अनभिहत xlvi 61 | अन्यैश्चकुम्भै xxiv 27 अनलभय viii 17 | अन्योन्य xcv 43 अनवरत xxxviii 5 | अपचारेण xlvi 2 अनिमित्तभङ्ग xlvi 8 | अपरस्यांचल xi 33 अनिमित्तसंहतै xcv 8 | अपरस्यां दिशि lxxxvii 23 अनियतचारः v 5 | अपरस्यां मणि xiv 20 अनिलभयं liii 70 | अपरस्यां स्वात्याद्यं ix 22 अनिलोऽनिलेन xxxii 2 | अपरेण xi 49 अनुगच्छति xxiv 32 | अपरे तु lxxxvii 44 अनुलोमगेऽअ xxx 19 | अपरेऽहनि xlviii 23 अनेकवर्णाकृति xxxvi 5 | अपरोन्त liii 34 अनेनैव xlviii 87 | अपसर्पणं xlvi 47 अन्तःपुरं xciii 2 | अपसव्यास्तु lxxxvi 57 अन्तःस्थे li 25 | अपसव्ये xxx 4 अन्तरङ्ग li 27 | अपहरति lxxxi 27 अन्तरचक्रं cvii 11 | अपिकाल civ 46 अन्तरमणि lxxxi 35 | अप्यर्थवस्य ii 4 अन्तर्धाय xlviii 48 | अप्रतिषिद्धा liii 31 अन्तर्वेदी v 65 | अप्रदीपाय ii 9 अन्तेगुरु ciii 12 | अप्रसिद्धं lxxxvi 61
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| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | |
|---|---|---|---|---|
| अप्राप्यमकर | iii | 4 | अर्थस्थाने | xl |
| अब्जेषु मूर्ध | lxxxviii | 20 | अर्धनिचितं | liii |
| अभयाश्च | xcv | 9 | अर्धपलस्य | lxxxii |
| अभिजिच्छ्रवण | xxxii | 16 | अर्धपुरुषे च | liv |
| अभिभवति | xxxiii | 30 | अर्धमतोऽष्टांशोनं | lxxix |
| अभिमुख | lxxxv | 9 | अर्धाङ्गुलात् | lviii |
| अभिहित | xvi | 41 | अर्धास्त | xlvii |
| अभ्यन्तरेतु | lxxxvii | 28 | अर्धास्तमिता | xxx |
| अभ्यर्चिता | xliv | 7 | अर्धेन यदातैलं | xlvi |
| अभ्यर्चितापण | xliii | 26 | अर्धोदितो | v |
| अभ्यर्च्य | lx | 16 | अर्धोन्नतेच | iv |
| अभ्यास | lv | 13 | अल्पसुतत्वं | liii |
| अभ्युच्छायादेकं | iv | 14 | अवन्त्यार्के | v |
| अभ्युन्नताभि | lxviii | 68 | अवमर्दनमिति | v |
| अभ्युन्नता वियति | xix | 8 | अवाक्प्रदानेऽपि | lxxxviii |
| अंशुविरोघे | xvii | 5 | अविकलपार्श्वा | lxviii |
| अमलव | iii | 39 | अविकाजश | lv |
| अमृतास्वाद | v | 1 | अविकृतसलिल | v |
| अम्बरमद्रक | xiv | 27 | अविदितवैवयः | ii |
| अम्बरमध्या | xxxiii | 11 | अविरतजनरावं | xliii |
| अम्बस्पन्दन | lxxix | 18 | अव्युच्छिन्नारेखा | iv |
| अयं विशेषोऽभि | xvii | 27 | अशनिजलानि | lxxix |
| अरभङ्गे | xliii | 22 | अशनिःस्वनेन | xxxiii |
| अरिष्टाशोक | lv | 3 | अशुभनिमित्तो | xlix |
| अरुणकिरणानुरूपे | v | 55 | अशुभनिरीक्षितः | civ |
| अर्कग्रहात्तु | v | 98 | अशुभमपि | xlv |
| अर्कातिसृते | xl | 4 | अशुभाकृति | xxx |
| अर्कोदयेऽब्धि | xxxix | 2 | अश्मक | ix |
| अर्कोदये विष्ट्र | xxxviii | 4 | अश्मन्तकस्य | liv |
| अर्चाथ | lix | 10 | अश्रुपात | lxvi |
4 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka अश्विनीपि cii 7 | अहिराजः liv 36 अश्विन्यामश्मकपं xi 54 | अहिवरुण x 2 अश्विन्यामश्व xv 26 | अहुताश xcvii 10 अश्विन्योऽथ cii 1 | अहुताशेऽनल xi 3 अश्वियमदहन xcviii 4 | अहोधाष्ट्र्यमसाधूनां lxxiv 15 अष्टमराशा xli 6 | आ अष्टमराशि xl 3 | आकारं lxxiv 3 अष्टशतं lxviii 105 | आकाररावी lxxxviii 33 अष्टाङ्गुलं lviii 6 | आक्रियमाण xcvii 5 अष्टांशाष्टांशोनाः lviii 19 | आगच्छन्तु xlviii 20 अष्टावंसौद्वादश lviii 25 | आगच्छन्त्यो xcii 3 अष्टावष्टा xlviii 51 | आग्नेयद्वि xcvi 6 अष्टाश्रिनीलरक्तं xliii 43 | आग्नेयेकौलिक lxxxvii 20 अष्टाष्टक liii 55 | आग्नेयेऽम्बुदनाशः xxxii 14 अष्टौचबहिष्कोणे liii 56 | आग्नेये यदि कोणे liv 97 अष्टौतुजानु lviii 22 | आग्नेयेसित xv 1 अष्टौसीसक lvii 8 | आग्नेय्यांदिशिको xiv 8 असनस्पन्दन lxxix 2 | आग्नेय्यांदिशिचन्द्र xxiv 33 असिकेशं xi 56 | आग्नेय्यामनला xcv 21 असितघन xxiv 15 | आग्नेय्यामपग v 82 असितेसितेन xvii 25 | आजानुलम्बबाहुः lviii 45 असिद्धि lxxxvi 62 | आज्यंतेजः xlviii 52 असिमुसलं vi 5 | आज्ञार्थमानास्पद civ 34 अस्तं याते xxxix 4 | आताम्रसंहत lxi 11 अस्फुटिता lxviii 57 | आत्मसुतकोश xlvi 7 अस्वेदन lxviii 33 | आत्मायमात्मनि lxxv 4 अस्वेदनौ lxviii 2 | आत्मासहैति lxxv 3 अहतक्षौम xlviii 50 | आदावनडुह xlviii 43 अहताम्बर xliii 24 | आदित्यहस्ताभि xv 29 अहिदेवे xv 7 | आदित्याबसवो xlviii 56 | आदित्ये पाञ्चनद x 6
5 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka आदित्ये सत्यौदार्य xv 5 | आयुष्यं xlviii 74 आदिशेदुभय xciv 10 | आयेरवि ciii 11 आदौनेच्छति lxxviii 12 | आरक्षक xvi 20 आदौयादृक्सौम्यः civ 50 | आरोग्य lxxxv 5 आद्यं द्वितीयं viii 34 | आरोहणमन्य xciii 6 आद्यं धनिष्ठांश viii 27 | आरोहति क्षिति xciii 13 आद्यः प्लवंगो viii 43 | आर्कंपयो l 25 आद्यौंगिराः viii 31 | आर्कंपयो liv 116 आधूम्रयातु xi 40 | आर्द्रंद्रव्यं xxviii 2 आधूम्रव्रण lxxxii 11 | आर्यम्णं होत vii 5 आनर्त्ताबुद xvi 30 | आर्यम्णेमार्दव xv 10 आपस्तथापवत्सः liii 49 | आर्याणामपि civ 51 आपाण्डुपीतिका liv 20 | आलभ्यमन्त्रेण xxiv 8 आपाण्डुरस्य lxxxviii 13 | आवन्तिकाजनपदाः v 64 आपृच्छेद्य lxxxviii 43 | आवन्तोऽथा xiv 33 आपोनामेशाने liii 48 | आवरणं v 12 आपोहिष्ठाति xlviii 72 | आवर्त्त इति xi 50 आप्येड्डुवड्डु x 14 | आवर्षात्प्रथमे xlv 16 आप्येमृद्वोजल xv 18 | आवाहितेषु xlviii 22 आप्येसलिलजपीडा ix 33 | आवाह्यैवंततः xlviii 21 आप्योदयक्षं xcvi 5 | आशाग्रहोपघाते xxxiii 21 आब्रह्मकीटान्त lxxiv 20 | आश्रमतोरणमूलं xliv 16 आब्रह्मादिविनिः i 5 | आश्लेषाद्धादक्षिण iii 1 आभीराञ्छबरान् v 38 | आश्लेषासु ix 28 आमध्याह्ना xxxix 3 | आश्वयुजब्देऽजस्त्रं viii 14 आमतिन्दुक lvii 1 | आश्विनचारुण vii 6 आमेवामृतपात्रे liii 94 | आषाढ v 77 आग्नेः क्षेमं xxix 11 | आषाढीपर्वकाले xxvii 6 आयुधज्वलन xlvi 23 | आषाढे जायन्ते viii 11 आयुधभृङ्गाररूपं xxx 23 | आषाढ्यां पौर्ण xxvi 15 आयुः श्रोबल lx 4 | आषाढ्यां सम xxvi 1 2
6
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | |
|---|---|---|---|---|
| आसन्नक्रमयोगा | xvii 3 | इशिविरुतं | lxxxviii 39 | |
| आसन्नाः | liii 86 | इष्टद्रव्याकरः | xliii 31 | |
| आसन्मघासुमुनयः | xiii 3 | इष्टानन्दकलत्रोवीरो | ci 11 | |
| आसीत्तमः | i 6 | इष्टापूर्तेनलभ्यन्ते | lvi 2 | |
| आसन्नोवल्मीको | liv 24 | ई | ||
| आस्यंसकेशनिचयं | lviii 15 | ईतिप्रायाप्रचुर | viii 40 | |
| आहिर्बुध्न्येफलमूल | ix 35 | ईषत्ताम्रं | lxxx 7 | |
| आहिर्बुध्न्येविप्राः | xv 24 | ईषत्प्रभिन्नेऽरुण | xii 15 | |
| इ | ईषदन्तुरकस्तनु | lxix 20 | ||
| इक्षुमतीत्यथ | xvi 4 | ईषायोगेदारु | lxxix 27 | |
| इक्ष्वाकुरलकनाथ | xi 58 | ईर्ष्यालुर्बोधोद्युतिमान् | ci 9 | |
| इच्छामिप्रष्टुं | li 23 | उ | ||
| इच्छेद्यदि | liii 114 | उकारवर्णे | lxxxix 15 | |
| इति निगदितमे | li 44 | ,,कमिदंहृयवेष्टित | xciii 15 | |
| इति पिटकविभागः | lii 10 | ,,कं यदुत्तिष्ठति | xliii 37 | |
| इति विबुधविकारे | xlvi 17 | ,,कविपरीतरूपो | xi 9 | |
| इतीदमुक्तं | lxx 15 | ,,कविपरीतलक्षण | xvii 10 | |
| इत्येतेविंशतिः | lvi 19 | ,,ग्राणिपूर्वभरणी | xcviii 8 | |
| इत्येतैश्चान्यैश्चाप्यथर्व | xlviii 71 | ,,द्यैर्घोरं | xc 15 | |
| इत्येवमुक्ते | lxxxviii 45 | ,,द्यैःष्ठीवनमुत्कट | lxxviii 4 | |
| इदमौशनसं च | l 23 | ,,द्यैः खराः | lxxxix 6 | |
| इन्दीवरासन्न | xii 9 | ,,च्छायाहस्तसंख्या | liii 26 | |
| इन्दोः पयोदविगमो | xii 10 | ,,च्छायातपादविस्तीर्णा | lvi 13 | |
| इन्द्रतरोर्वल्मीकः | liv 69 | ,,च्छायात्सप्तगुणा | liii 27 | |
| इन्द्रध्वजनिर्दिष्टान्यग्नि | xlviii 78 | ,,त्तममष्टाभ्यधिकं | liii 4 | |
| इन्द्रध्वज नीराजन | cvii 6 | ,,त्तमं विंशतिर्हस्ता | lv 12 | |
| इन्द्राग्निदैवते | xv 14 | ,,त्तरतः कैलासो | xiv 24 | |
| इन्द्राग्निदेवं | viii 45 | ,,त्तरतश्च करीरस्याद्दिग्गृहं | liv 67 | |
| इन्द्वर्क्रमण्डलाकृति | v 2 | ,,त्तरतश्च मधूकादहि | liv 35 | |
| इमांचविन्द्यादनुरक्त | lxxviii 5 |
7
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | ||
|---|---|---|---|---|---|
| उत्तरतः खसुतस्य | xviii | 3 | उदरं कथयन्ति | lxx | 25 |
| ,,त्तरदिगादिपतिता | xxxiii | 15 | ,,दितः पश्चादेकः | xx | 8 |
| ,,त्तरपूर्वेकोणे | liii | 112 | ,,दितं यदि | xxiv | 31 |
| ,,त्तरमयनमतीत्य | iii | 5 | ,,द्ध संग्रहणं | xcvi | 3 |
| ,,त्तरमार्गे स्पष्टमयूखाः | xlvii | 9 | ,,द्धाभ्यां | lxx | 17 |
| ,,त्तरमार्गोयाम्यदि | ix | 6 | ,,द्यान देवालय | xliii | 13 |
| ,,त्तरवीथि | xlvii | 4 | ,,द्यानसलिलका | xvi | 28 |
| ,,त्तरवीथिषु शुक्रः | ix | 8 | ,,द्युक्तान् | iv | 24 |
| ,,त्तर शालाहीनं | liii | 37 | ,,द्वृत्तदस्युगण | xix | 19 |
| ,,त्पतद्भिरिवखंतुरङ्गमैः | xliv | 26 | ,,श्वेतकुक्षाः | lxviii | 20 |
| ,,त्पातगण्ड | lii | 9 | ,,श्वतमीयच्छुक्लं | iv | 8 |
| ,,त्पातान् गणित | xlvi | 99 | ,,श्वतविपुलैः | lxviii | 70 |
| ',त्सर्गान्नशुभदमासनात् | xciii | 1 | ,,न्मत्तानां च | xlvi | 97 |
| ,,दकार्गलमारामिक | cvii | 7 | ,,न्मादः | liii | 77 |
| ,,दगयनेसितपक्षे | lx | 20 | ,,न्मानमानगति | lxviii | 1 |
| ,,दगर्जुनस्य दृश्योवल्मीको | liv | 12 | ,,पचयभवनो | civ | 61 |
| ,,दगर्थ विप्रपीडा | lxxxvii | 45 | ,,पचितदेहो | lxviii | 100 |
| ,,दगादि पुरोहित | xxxvi | 1 | ,,पचितसमवृत्त | lxix | 13 |
| ,,दगादि प्लवमिष्टं | liii | 89 | ,,परिचरवसुप्रवर्त्तितं | xliii | 68 |
| ,,दगायतो महान् | xi | 29 | ,,परिचरस्या | xliii | 8 |
| ,,दगारोग्य सुभिक्ष | viii | 15 | ,,पलाविना | xlvi | 42 |
| ,,दङ्मुखश्चापि | lxxxix | 5 | ,,पहतदाम्भिक | xvi | 36 |
| ,,दङ्मुखः प्राङ् | lxxxv | 8 | ,,पान्त्यगोभृगोः | civ | 38 |
| ,,दपानयन्त्रगान्धर्व | xvi | 17 | ,,प्तं च बीजं | lv | 26 |
| ,,दयगिरिभद्रगौड | xiv | 7 | ,,भयपार्श्वगतौ | xxx | 26 |
| ,,दयति सततं यदा | xlvii | 15 | ,,भयोरपि जिघ्रणे | lxxxix | 13 |
| ,,दयनेवसुभिक्षं | xi | 45 | ,,रः कुचदक्षिण | li | 43 |
| ,,दयशिखरिसंस्थो | xxviii | 3 | ,,ल्कयायदाशशी | iv | 28 |
| ,,दयसमये यः | xvi | 39 | ,,ल्क्या विनिहतः | xii | 21 |
| ,,दये च मुने | xii | 7 | ,,ल्कानिपातास्ताडितो | xxiv | 25 |
| ,,दयेऽस्ते वा | xlvii | 20 | ,,ल्कापक्षेणफलं | xxxiii | 2 |
8 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka उल्कामितादितशिखः xi 61 | एकादशमुहुंशं xliii 47 ,,ल्कामन्त्रिविनाशं v 93 | एकादशे पिङ्गल viii 48 ,,ल्काशिरसि विशाला xxxiii 8 | एकानंशाकार्यदेवी lviii 37 ,,ष्णा शीता च मही liv 94 | एकावलीनामयथेष्ट lxxxi 36 ,,स्नाक्रोडक lxxxvii 22 | एकाशीतिविभागेऽश liii 42 ऊ | एकेन वर्णेन रसेन चाम्भः liv 2 ऊरुघनौकरिकर lxx 3 | एकेनाक्ष्णासाधुणा lxxxix 10 ऊरुचाङ्गुलमानैश्च lviii 17 | एकेनावाक्शिरसा lxxix 28 ऊर्ध्वं सिद्धिः lxxxvii 7 | एकैकभवैः स्निग्धैः lxviii 81 ऊर्ध्वकरोदिवस iii 21 | एकैकमब्देषु न विहतेषु viii 22 ऊर्ध्वमुखाश्चलपक्षाः xcv 11 | एकैकमेकभागं lxxvii 18 ऊर्वोर्द्वाविंशेश्याद् l 14 | एकैकस्मिञ्छुकेशंतं xiii 4 ऊर्वोर्यानाङ्गनालाभं lii 7 | एकैव मूत्रधारावलिता lxviii 12 ऋ | एकोदुर्भिक्ष iii 19 ऋज्वीहिता vii 16 | एको निशीथेऽनल lxxxviii 41 ऋज्यतिवक्रा vii 15 | एतत्प्रयुज्यमानं xlviii 82 ऋतुविपरीतास्तरवो iii 10 | एतदनूपेवाच्यं liv 89 ऋतुस्वभावजाद्येते xlvi 96 | एतद्गुणयुक्तानां lxxxi 18 ऋषिधर्मपितृब्रह्मप्रो xlvi 10 | एतानिसर्वाणि lxxxi 30 ऋष्यशिरोरुहपादो lxv 8 | एताह्यमेदाश्चशिलाः liv 111 ए | एतेदक्षिणपार्श्वे liii 54 एकचरणानुविद्धाः xiv 31 | एतेद्रुमाः काण्डरोप्या lv 5 एकतश्चद्वितश्चैवत्रितो xlviii 65 | एते यदि सुस्निग्धा liv 51 एकदृमेण धन्यं lxxix 38 | एते सर्वे मोक्षावक्तव्या v 91 एकनिभायन्नमहीतृण liv 90 | एतैः सलिलद्रोणः lvii 2 एकं दीप्त्यायोजनं भाति xxx 32 | एलात्वक्पत्रान्रमधु lxxvii 32 एकक्षै चत्वारः xx 6 | एवं देशे देशेत lxxxviii 10 एकस्थानेरुवनदीतः lxxxvi 64 | एवमुपरागकारण v 13 एकस्थाः पञ्च यदा liv 82 | एवं रखेः क्षेत्रनवांश xcvi 10 एकादश भागयुतः liii 24 | एवं विरक्ताजनयन्ति lxxviii 2
9 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka ऐ | कङ्कटकङ्कण xiv 12 ऐन्द्रं षडश्रि शुक्लं lxxx 8 | कङ्कप्लवोल्लूककपोत lxxi 12 ऐन्द्रं स्तुतकुलजाति xxxii 18 | कङ्कानांमवरुण xi 26 ऐन्द्रस्य शीतकिरणो iv 5 | कच्छपकः पुरुषाङ्गे liv 34 ऐन्द्राग्न्याख्ये x 11 | कटिरपि च कृत्तिका cv 2 ऐन्द्राग्न्याख्ये वैश्वे च xxiii 8 | कटिरणदशविपुला lviii 23 ऐन्द्रानलदिशोर्मध्ये lxxxvi 29 | कटुतिक्तरसायनविधव xvi 33 ऐन्द्रे भूपविरोधः v 21 | कडिति फलाप्तिः xcv 55 ऐन्द्र्यादिदिगवलोकी xcv 19 | कण्टकिनोये चस्यु lxxix 4 ऐन्द्र्यांदिशिशान्तायां lxxxvii 1 | कण्टकिमिथ्रैसौम्ये xcv 37 ऐन्द्र्यांदिशीन्द्रलिङ्गा lx 11 | कण्टक्यकण्टकानां liv 53 ऐरावतकुलजानां lxxxi 20 | कण्ठाद्द्वादशहृदयं lviii 16 ऐशानस्यासन्न lxxxvii 40 | कण्डूयेतेयदङ्गं liii 59 ऐशानेव्रतयुक्ता lxxxvii 26 | कथयन्ति पार्थिववधं xxxviii 1 ऐशानोयदि शीतलो xxvii 9 | कथयाम्यतः xlviii 29 ऐशान्यादिषु कोणेषु liii 81 | कदलीकाण्डनिभोरुः cv 12 ऐशान्यां देवगृहं liii 116 | कनकशिलाचय xxiv 1 ऐशान्यांदिवलोको lxxxvii 16 | कनिष्ठिकामूलभवा lxx 13 ऐशान्यां मेरुकनष्ट xiv 29 | कनिष्ठिकावातदनन्तरा lxx 16 ऐशान्यां सम्प्राप्ति xcv 24 | कन्यागतेदिनकरेचामर xlii 7 ऐश्वर्यं गम्भीरे lxviii 66 | कपित्थवल्लीकरणाग्रमूला lv 22 ओ | कपिलः प्रधान i 7 ओजेतस्कर xv 23 | कपोतकीचश्यामा lxxxviii 5 ओष्ठैः स्फुटित lxviii 52 | कमलजविधातृहरि xcix 1 औ | कमलोदरद्युतिमुखः lviii 48 औशीनरमपिसौम्ये xi 55 | कम्बलमपनीय ततः xlviii 54 क | कम्बुग्रीवो राजा lxviii 32 ककुभकरीरा liv 76 | करगोविरुतेवर्षं xcv 54 ककुभवटाग्रप्लक्ष liv 119 | करवीरोत्पलगजमदघृत l 21 3 | करिकरसदृशौवृत्ता lxviii 35 | करिणश्चहस्ति xxix 7
10
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | ||
|---|---|---|---|---|---|
| करिवृषरथौघ | lxviii | 95 | काकपदमक्षि | lxxx | 15 |
| करेणकर्मसिद्धयः | lxxi | 4 | काकेतिविघातः | xcv | 53 |
| करेतिकलहं | xcv | 51 | काकोदुम्बरिकायां | liv | 19 |
| कर्कणिकोद्रवकदली | xli | 4 | काञ्चीकलापनूपुरगुरु | xlviii | 14 |
| कर्कण्यर्कमधुगन्धतैल | xlii | 5 | काठिन्यंयाति | xxi | 36 |
| कर्पूरचोलमलैः | lxxvii | 14 | काणेनाक्षणादक्षिणे | xcvi | 12 |
| कर्णयुग्ममंपियुक्त | lxx | 9 | काद्यास्तुवर्गाः | xcvi | 15 |
| कर्णाटमहाट | xiv | 13 | कापोतारुण | v | 56 |
| कर्णोपान्तःकार्योऽर्ध | lviii | 7 | कामंप्रदीपयति | lxxvii | 35 |
| कर्तुरनुकूलदिवसे | lix | 1 | कामिनींप्रथम | lxxiv | 18 |
| कर्पूरस्फटिक | lxxxi | 28 | काम्बोजचीनयवनान् | v | 80 |
| कर्बुरकोऽहिःपुरुषेकृष्णा | liv | 42 | कार्त्तिकेऽश्वयुजि | vii | 18 |
| कर्मप्राप्तिर्दशमेऽर्थक्षयश्च | civ | 45 | कार्त्तिक्यामन | v | 69 |
| कर्मसङ्गमयुद्धेषुप्रवेशे | lxxxvi | 47 | कार्मुकमृगघट | xl | 14 |
| कर्माङ्गलथवाष्टक | lxxix | 8 | कार्मुकरूपेषुद्वानियन्त्रतु | iv | 12 |
| कर्पकपाखण्डि | v | 29 | कार्यंतूमूलशकुनेऽन्तरजे | xcv | 60 |
| कलत्रकलहाक्षिरुग्जठर | civ | 16 | कार्यंपौष्टिकमौषधादि | c | 5 |
| कलशमृणाल | lxviii | 46 | कार्यस्यव्याघातस्तुणकूटे | xcv | 36 |
| कलशेप्वेतान् | xliv | 11 | कार्याचतुर्भुजाया | lviii | 38 |
| कलशोदकेषु | xliv | 20 | कार्यातुकेश | lviii | 13 |
| कलहस्वरदीप्तेषुस्थान | lxxxvi | 63 | कार्योऽष्टभुजोभगवान् | lviii | 31 |
| कलहोनैर्ऋत | lxxxvii | 35 | कालकधुन्धुक | lxxix | 37 |
| कलास्वभिज्ञः | lxix | 36 | कालकसंशंकृष्णं | lxxix | 35 |
| कलिङ्गवङ्गान्मगधान् | v | 79 | कालोद्भवैः | xii | 16 |
| कलुषंकटुकंलवणंविरसं | liv | 122 | काकियुगन्धरपौरव | xxxii | 19 |
| कलुषामन्तद्युतयोलेखा | lxxxii | 4 | काश्मीरकान् | v | 70 |
| कल्माषबभ्रुकपिला | xxx | 12 | काभीरान् | v | 78 |
| कर्विसप्तजिलं | xliii | 55 | किञ्चिदधऊर्ध्व | xliii | 48 |
| कष्टःप्लवङ्गोबहुशः | viii | 44 | किन्वन्निलदहन | xxxii | 7 |
| काइतिकाकस्यरुतं | xcv | 50 | किमपिकिलभूतमभव | liii | 2 |
| काकद्वयस्यापि | xcv | 57 | किंवातःपरमन्यच्छस्त्र | xxi | 4 |
11 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka किलिकिलिविरुतं lxxxviii 22 | ,, लजनविनाश lxxviii 10 किलिकिलिकिलि lxxxviii 21 | ,, लपांसन xvi 35 किष्किन्धकण्टक xiv 10 | ,, वलयवैडूर्याम्बुज xxx 20 किष्किषिशब्दः lxxxviii 16 | ,, शयुकाशर liii 95 कीटाम्बुमक्षि xcvii 7 | ,, सुमरसपान xlviii 7 कीर्तिर्लक्ष्मीर्धृतिः xlviii 57 | ,, हकावेशपिहित ii 15 कुकुटरुतंप्रदोषे xlvi 69 | कृपेनापस्मारो liii 76 ,, :,टस्त्वृजुतनू lxiii 1 | कूर्मःप्रथमे liv 44 ', ,, टीचमृदुचारु lxiii 3 | कूर्मवसासृक् l 22 ,, ,, टेभपरित्य lxxxvi 20 | कृकलासकपि lxxix 25 कुक्षिकुचजठर li 31 | कृकलासकपि xciv 5 ,, जविजिते xvii 23 | कृकलासकाक l 3 ,, जेभिघातः civ 11 | कृकवाकुजीव xlviii 6 ,, अरुतिगजपृष्ठः lvi 25 | कृत्वाप्रभूतं lvi 1 ,, ट्कःकुटिलश्चैव lxv 9 | कृन्दारुणस्य liv 124 ,, ड्थमुक्ति lxxxix 9 | कृत्वावलिंप्रभूतं lx 17 ,, ज्नानुजातवल्ली lix 3 | कृत्स्नाङ्गोपाङ्ग ii 6 ,, व्जोनाम्नायः lxix 35 | कृशदीर्घेदेशमं lviii 55 ,, मुद्धतिकुमुद xi 43 | कृषिबीजगृहाश्रय c 4 ,, म्भाधस्ताज्जङ्घा lxxix 30 | कुष्टांप्ररूढबीजां liii 96 ,, म्मेगुरुर्गविशशीसूर्यो xl 7 | कृष्णचतुर्दश्य c 2 ,, म्मेऽन्तर्गिरिजान् v 42 | कृष्णश्वेतकपीतक lxxxi 19 ,, म्भोऽन्त्यधनिष्ठा cii 6 | कृष्णाःश्वेताःपीताः lxxxi 4 ,, रूभूमिजाः xvi 31 | कृष्णोगलेऽस्यबिन्दुः xlv 3 ,, रविन्दभवाः lxxxii 2 | केकेतिपूर्ण lxxxviii 25 ,, र्यदिहनि xliii 51 | केचित्तुशकुनद्वार lxxxvi 53 ,, र्याद्वारो xlviii 11 | केचिदनन्त xxxv 2 ,, र्याङ्गवेशुभ c 3 | केचिद्यथामिवृष्टं xxiii 4 ,, र्वन्तिभास्कर cii 2 | केचिद्वदन्तिकार्तिक xxi 5 ,, र्वन्त्येताः xxxiii 20 | केतुकुजराहुशुक्रा xvii 7 | केत्वाद्युदय xxxviii 8
12
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | |
|---|---|---|---|---|
| केन्द्रत्रिकोणेषुशुभ | lxxviii 25 | ,,तजानलात्तु | xi 21 | |
| केवलचन्दनरचितं | lxxix 14 | ,,ञ्क्षितौक्षपित | xix 17 | |
| केशधरचिपिटनासिक | xiv 26 | ,,मया क्रोध | xlviii 13 | |
| कैकयवसातियामुन | xiv 25 | ,,यमिति | viii 52 | |
| कोडुक्रीतिक्षेभ्यः | lxxxviii 17 | क्षामाजुगुप्स | iii 15 | |
| कोणाच्चतुर्थ | lxxxvii 5 | ,,रं पयोऽत्र | liv 71 | |
| कोशनिगूढे | lxviii 8 | ,,रेकदल्या | l 26 | |
| कोशभवनाग्निहोत्रिक | xvi 14 | ,,रेकदल्या | liv 117 | |
| कोशलकलिङ्ग | xvii 22 | क्षितिकम्प | xxxii 1 | |
| कोष्ठागारगते | xlvii 5 | ,,तितनय | i 4 | |
| कौबेरीचात्रशिरावहति | liv 39 | ,,तिरुत्तम | xix 14 | |
| कौबेर्यां | lxxxvii 25 | क्षीरघृतं | xlvi 43 | |
| कौरवचित्रकराणां | ix 30 | ,,रमृष्ट | xciv 11 | |
| कौशेयपट्ट | xvi 29 | ,,रं शृतं यः | lxxvi 4 | |
| क्रकेति च | lxxxviii 30 | ,,रेणवस्ता | lxxvi 7 | |
| क्रव्याद् कौशिक | xliii 62 | ,,रेण वागू | lxxvi 10 | |
| क्रव्याद रूपैर्वृक | lxx 22 | ,,रेङ्गने | lv 23 | |
| क्रियमाणं यदि | xlix 6 | क्षुत्प्रम्लान | iii 13 | |
| क्रूरग्रहसंयुक्तेकरकाशनि | xxi 33 | ,,दनलमृत्यु | xxxiv 15 | |
| ,,रःषष्टेक्रूर | xcvi 13 | ,,न्मारुङ्घटनिभः | iii 31 | |
| ,,रोगदोषदुष्टैश्च | lxxxvi 68 | क्षेमारोग्य | iv 27 | |
| ,,रोधनीस्थूलमतिः | lxix 34 | क्षोमं चतुः | xxvi 6 | |
| क्रोशादूर्ध्वशकुनविरुतं | xcv 62 | श्वेडास्फोटितपुण्या | lxxxvi 39 | |
| ,,ष्टुकोलूकहारीतकाक | lxxxvi 21 | श्वेडास्फोटितवादित | xxxiii 23 | |
| क्रौञ्चकाञ्चीकलापा | lvi 6 | |||
| ख | ||||
| ,,श्वद्रिपु | xciii 7 | खगनिलय | liii 118 | |
| क्वचित्ववृष्टिः | viii 28 | खं खेतित्वोञ्चै | lxxxix 16 | |
| ,,चिदसितसितैः | xxiv 13 | खञ्जनकोनामायं | xlv 1 | |
| ,,णितं मरणायोकं परा | l 5 | खट्वाङ्गवीणा | lxix 29 | |
| क्षणतिथ्युडु | lxxxvi 15 | खड्गदाशरपाणि | lviii 33 |
13 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka खण्डोवकः xlvii 24 | गार्गियं शिखिचार xi 1 खदिरपलाशो xliv 12 | ,,वोदीनाः xcii 1 खप्रकृति lxviii 111 | गिरयोऽन xxviii 6 खरेखरेपथिकागम xcv 52 | ,,रिदुर्ग xvi 37 खर्जूरजम्ब्बर्जुन liv 101 | ,,रिभिः पुरा xxxii 3 खर्जूरीष्ट्रिशिर liv 58 | ,,रिशिखर xvi 34 खलिनं हयाय xliv 22 | ,,रिसलिलदुर्ग xvi 6 खसमगधशिबिर xiv 6 | गीतरवत्तूर्य xlvi 61 खुरदेशे योग्रन्थिः lxxix 31 | गीतवादित्र xlvi 91 | गुग्गुलु बालक lxxvii 9 ग | ,,आत्रयस्य मूल्यं lxxxi 12 गच्छतस्तिष्ठतो lxxxvi 35 | ,,डणूपपाय xliii 38 ,,च्छत्यध्वानं civ 44 | ,,रुणाजितेबुधे xvii 16 ,,जदन्तः lxxix 19 | ,,रुणाजितेऽवनि xvii 13 ,,तानि वर्षाणि viii 20 | ,,रुभृगुश्चापर ix 37 ,,त्वा द्वितीय xlviii 75 | ,,रुसित xlvi 11 ,,न्धर्वदेव xiii 8 | ,,हराजोवृषणोहंसः lvi 18 ,,न्धर्वपुरं xcvii 13 | गृहचैत्य xlvi 70 ,,मने कर्णसम xcv 25 | ,,हतरुस्तोरण xxx 6 ,,रुडाकृतिश्च lvi 24 | ,,हनगर ग्रामेषु च liii 67 ,,र्ताकुकुट lxxxviii 8 | ,,हपटलेऽर्थं xlv 8 ,,र्भः पुष्टः xxi 35 | ,,हमध्येहस्तमितं liii 90 ,,र्भयुता जठरे li 38 | गोगोष्ठसत्समागम xlv 5 ,,र्भसमयेऽतिवृष्टि xxi 34 | ,,चरपीडायामपि xli 13 ,,र्भाणां पुष्टिकराः xxi 18 | ,,जिह्वासंस्थानो l 7 ,,र्भेष्वाप iii 16 | ,,धूमशालयिव xix 6 ,,र्भोपघात xxi 25 | ,,पाः पशवोऽथ v 36 ,,वि वस्त्र xli 3 | ,,पुच्छस्थेवल्मीकगे xcv 35 गान्धर्वनगर xxxvi 4 | ,,पैर्यष्टाहतानां ciii 13 ,,धारयशो xiv 28 | ,,प्रवेशसमयेऽप्रतो xxiv 35 ,,न्धार सौवीरक iv 23 | ,,महिषाज विषाणैः lvii 7 .4
14
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | ||
|---|---|---|---|---|---|
| ,,मायुगृध | xcvii | 9 | च | ||
| ,,लाङ्गलयोः | xlvi | 63 | चक्रधनुः | xx | 2 |
| ,,शशक्रौञ्चलोमाश | lxxxvi | 22 | ,,क्रासिपरशु | lxviii | 47 |
| ,,हरणशख | lxxxvii | 39 | ,,ण्डा धृष्या | lxviii | 92 |
| गौरसितक्षिति | xliii | 16 | ,,तुरङ्गुलंवसिष्ठः | lviii | 8 |
| ग्रन्थतश्चार्थत | ii | 13 | ,,तुरङ्गुलविस्तारः | xlix | 3 |
| ,,न्थस्य यत्प्रचारतोऽस्य | cvi | 5 | ,,तुरस्रं धूर्त्तानां | lxviii | 56 |
| ,,न्थिप्रचुरायस्मिन् | liv | 81 | ,,तुरस्रमवनिखाते | lviii | 54 |
| ,,न्थोऽन्यथाऽन्यथार्थं | ii | 2 | ,,तुर्थगे | civ | 21 |
| ,,सन्मिति यद्वात्र्यंशः | v | 46 | ,,तुर्थेगृहं | civ | 42 |
| ,,स्तावुदितास्तमितौ | v | 27 | ,,तुर्दशीं पञ्चदशीं | ix | 36 |
| ,,स्ते क्रमान्निमित्तैः | v | 63 | ,,तुष्पदाः | xlvi | 55 |
| ,,हणोपगते | v | 66 | ,,तुःषष्टिपदं | lvi | 10 |
| ,,हशशियोगः | cvii | 3 | ,,त्वारिंशत् | vii | 13 |
| ,,हसंवर्तसमागम | xx | 5 | ,त्वारिंशद्वियुता | lviii | 24 |
| ,,हांश्वसर्वन्नक्षत्रै | xlviii | 26 | ,,त्वारिंशद्दीना | liii | 10 |
| ग्रामस्य मध्ये | lxxxix | 18 | ,,त्वारिमुख्यानि | viii | 26 |
| ,,मारण्यप्रचाराद्यं | lxxxvi | 10 | ,,त्वार्यार्यम्णाद्यानि | xxxii | 8 |
| ,,मारण्याम्बु | lxxxvi | 6 | ,,त्वार्येतानिचर्माणि | xlviii | 45 |
| ,,मेभषित्वा च बहिः | lxxxix | 14 | ,,न्दनकुष्ठसमङ्गा | xliv | 9 |
| ,,मौमध्यम | lxxxvi | 40 | ,,न्दनतुरुष्कभागौ | lxxvii | 30 |
| ,,म्यः प्रदीप्तः | xcvi | 7 | ,,न्द्रमा यदि | xviii | 2 |
| ग्रीवाज्येष्ठा श्रवणं | cv | 4 | ,,न्द्रातपस्फटिकमौक्तिक | liv | 110 |
| ग्रीष्मेरक्तो | iii | 26 | ,,न्द्रोऽधस्थः | v | 11 |
| घ | ,,पलश्वतुरो | ci | 3 | ||
| घटमूर्धाध्वा | lxviii | 80 | ,,म्पककुसुमैः | xxix | 8 |
| ,,टवत्सुषिरं | lxxix | 33 | ,,म्पोदुम्बरकौशाम्बि | xvi | 3 |
| ,,नबालक शैलेयक | lxxvii | 13 | ,,रपुरुषकुहकजीवक | xvi | 18 |
| घृतोशीरतिलं क्षौद्र | lv | 7 | ,,लयति पवनः | xxxii | 28 |
| घ्राणागण्डे | lii | 3 | ,,लिताच लवष्माणो | xxxii | 17 |
| ,,णायादक्षिणे द्वारे | li | 39 | |||
| ,,णोद्देशे सबलिर्मार्जार | lxi | 15 |
15
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | |
|---|---|---|---|---|
| चातुर्वर्ण्यव्यासो | liii | 12 | चैत्र्यां तु | v |
| ,,पगते | xlii | 10 | चौरकवणश्चौराश्चित्रै | xcv |
| ,,पं मघोनः | xxxv | 7 | छ | |
| ,,मरदण्डपरीक्षा | cvii | 9 | छत्रचितिरूप | xcvii |
| ,,मीकराशोक | xliii | 33 | ,,र्ध्वजस्वस्तिक | lxxi |
| ,,रवशाद् | civ | 40 | ,,र्ध्वजादर्श | xliii |
| ,,रश्चागस्त्यमुनेः | cvii | 2 | ,,र्भङ्गपतने | xliii |
| ,,रोदयाः प्रशस्ताः | vi | 12 | ,,र्स्रगम्बरयुतः | liii |
| ,,षशिखिरजत | xxxiv | 4 | छागशुभाशुभ | lxv |
| ,,षस्य काकेन | lxxxviii | 24 | ,,याः क्रमेण | lxviii |
| चिकित्सितमथैतेषां | lv | 15 | ,,या शुभाशुभफलानि | lxviii |
| ,,कचिकि | lxxxviii | 29 | छिक्करः कूटपूरी च | lxxxvi |
| ,,चिदितिशब्दः | lxxxviii | 14 | ,,त्वाग्रे चतुरङ्गुलमणौ | xliii |
| ,,तिकेशकपालेषु | lxxxvi | 60 | ,,न्यात्प्रभातसमये | xliii |
| ,,त्रगर्भोद्भवः | xlvi | 95 | ,,न्याद्यदि न | liii |
| ,,त्राम्बरमाल्यधरः | ci | 8 | ,,न्नाग्रेऽङ्गुच्छेदः | xcv |
| ,,त्रा ललाटसंस्था | cv | 5 | ,,न्नानुरूपयागम्य | lxviii |
| ,,त्रासु | xi | 57 | ,,न्नाभिन्नकृमिखात | li |
| ,,त्रास्थे | x | 10 | छेद्योद्यविकारी | liii |
| ,,त्रोऽथवाऽपि | iii | 22 | ज | |
| ,,हं गवामथ | cvii | 8 | जगति प्रसारितमिवा | ii |
| ,,हं दर्दुर आदौ | liv | 64 | ,,द्भाग्रे परिणाहश्चतुर्दशो | lviii |
| ,,हं ध्वजो | lxxxvi | 78 | ,,द्गामध्ये गुल्फे | l |
| ,,हमपि | liv | 7 | ,,नयति च | civ |
| ,,पिटग्रीवो निःस्वः | lxviii | 31 | ,,नयति शुक्रः | civ |
| ,,रिल्विरिल्विति | lxxxviii | 38 | ,,न्मन्वायासददोऽर्कः | civ |
| चूर्णीकृतैर्माषितलैर्यवैश्च | lv | 25 | ,,म्भूमिस्तिलमाषाः | xxix |
| चैत्ये भयं ग्रहकृतं | liii | 88 | ,,म्भूवृक्षस्य | liv |
| ,,त्रसितपक्षजाता | xxi | 12 | ,,म्बूचेतसवानीर | lv |
| ,,त्रस्य बहुलपक्षे | v | 6 | ,,म्बूस्त्रिवृता | liv |
| ,,त्रेमन्दा वृष्टिः | viii | 8 |
16
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka | ||
|---|---|---|---|---|---|
| जम्ब्वाश्वोद्गग्धस्तैः | liv | 8 | ज्येष्ठाद्यं | ix | 18 |
| ,,यति जगतः | i | 1 | ज्येष्ठासु न | ci | 10 |
| ,,ये धरित्र्याः | lxxiv | 1 | ज्येष्ठासु नृपपुरोहित | x | 13 |
| ,,लकेतुरपि च | xi | 46 | ज्येष्ठेजातिकुलधन | viii | 10 |
| ,,लपरिहीनेदेशेदृश्यन्ते | liv | 47 | ज्येष्ठे नरेन्द्रद्विजराज | v | 76 |
| ,,लपरिहीनेदेशेवृक्षः | liv | 21 | ज्येष्ठसितेऽष्टम्यादाः | xxii | 1 |
| ,,लमध्येऽनावृष्टिः | xxxv | 5 | ज्येष्ठ्यां समतीतायां | xxiii | 1 |
| ,,लमांसाईज्वलने | xlvi | 19 | ज्योतिः शास्त्रमनेक | i | 9 |
| ,,लमृत्युरेक्वषणो | lxviii | 9 | ज्योतिः शास्त्रसमुद्रं | cvi | 1 |
| ,,वजातिबलस्थानहर्ष | lxxxvi | 19 | ज्योतिष्मतीं | xlviii | 39 |
| जातानि | xix | 21 | ज्योतिष्मत्यः | lxxxi | 5 |
| ,,तीफलपत्रैला | lxxvii | 33 | ज्यौतिषमागमशास्त्रं | ix | 7 |
| ,,तीफलमृगकर्पूर | lxxvii | 27 | ज्वालाधूम्रकाथा | xlvi | 49 |
| ,,त्यंमनोभवसुखं | lxxv | 1 | |||
| ,,मयो यानि गेहानि | lxxiv | 10 | त | ||
| ,,मित्रकेन्द्रसंस्थौ | xl | 10 | तक्रकाञ्जिकसुराः | liv | 114 |
| ,,या वा | lxxiv | 11 | तक्षकवासुकिकुलजाः | lxxxi | 25 |
| ,,रहुव्यां श्रवणात् | ix | 3 | तक्षशिलमार्तिकाबतबहु | xvi | 25 |
| ,,लगवाक्षकयुक्तो | lvi | 22 | तडिद्धैमकक्ष्यैर्बलाका | xxiv | 17 |
| ,,लश्वचरणौ नेष्टौ | lxxxvi | 46 | ततो वृषस्य | xlviii | 44 |
| ,,लान्तरगे | lviii | 1 | तत्पश्चिमदिशां | lxxxvi | 13 |
| ,,हकाहिशशक्रोड | lxxxvi | 42 | तत्परः | viii | 47 |
| जिह्वा ग्रीवा | li | 9 | तत्रदेवमुनिसिद्ध | lxxiv | 19 |
| ,,ह्या रक्ता | lxviii | 53 | तत्रपताकाः | xliii | 27 |
| ,,ह्रोपलेढि | v | 45 | तत्रषडश्रिर्मेरुर्द्वादश | lvi | 20 |
| जीमूतध्वनिदीप्तेषु | lxxxvi | 59 | तत्राद्र्ईमासाः | xxiv | 10 |
| ,,वितराज्यविनाशं | xlix | 7 | तत्रैवस्वात्याद्ये | xxii | 2 |
| ,,वे जन्मन्यपगतधन | civ | 25 | तत्संपातानव | liii | 62 |
| ,,वेन भवति | lxix | 2 | तथैवफाल्गुने | xxv | 6 |
| ,,वे शुक्राभिहते | xvii | 18 | तदनन्तरेदिशिनाशः | lxxxvii | 30 |
| ज्ञेयोविशालमूर्ति | iv | 20 | तदनन्तरदिशि | lxxxvii | 2 |
17 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka तदनन्तरे lxxxvii 36 | तापसेशोण्डिकेष्ट्रे li 22 तदलमिति i 8 | तामसकीलकसंज्ञा iii 7 तदुपहतमितिप्रक्षते xv 32 | ताम्रः कपिलोवार्कः iii 23 तद्धातुमहाभूत lxix 4 | ताम्राबलपतिमृत्युं xxx 13 तनुभूस्पृग्वालधयो lxi 12 | ताम्रैः समेता liv 109 तनूरस्कशिरोग्रीवाः lxxxvi 9 | ताम्रोष्ठतालुवदनाः lxvii 6 तन्वे सुपरिज्ञाते ii 3 | तारणं viii 36 तन्मित्रपूजा lxxviii 6 | ताराग्रहस्य xxiv 18 तमोधिको lxix 9 | ताराग्रहैर्युक्तैः lxix 1 तं विष्णुतेजोद्भव xliii 6 | ताराफलपादकरी xxxiii 3 तरवो वर्जयितव्याः lix 4 | तारापुञ्ज xi 25 तरुणतरुगुल्मवल्ली xlviii 5 | ताराहस्तं xxxiii 7 तरुतालीविदलाम्बर lxxxvi 76 | तारोल्कापातकलुषं xlvi 86 तरुशिखरोपगताः xxviii 8 | तारोल्कापाता xxxii 13 तलक्षणानि xxi 2 | तालभूर्जपटदर्शनैंशुकं li 14 तलक्षणोऽस्थिकेतुः xi 30 | तालीपन्नलता xxvii 3 तस्माद्द्वितीयो viii 29 | ताल्वोष्ठदन्तपाली lxviii 97 तस्माद्राज्ञाधिगन्तव्यो ii 10 | तात्रेव तु यथा lxxxvi 52 तस्मिन्काले v 15 | तिथियाव्यर्कभ lxxxvi 58 तस्मिन्निधिर्भवति xlv 12 | तिन्तिडीत्यपि lv 21 तस्मिन्मण्डलमालिख्य xlviii 24 | तिमिसिताम्बुधरं xii 5 तस्मिन्सन्ध्याकाले xlvii 22 | तिलकाम्रातकवरुणक liv 50 तस्करविलुप्तचित्ताः iii 14 | तिलाश्वगन्धा lxxvi 9 तस्या विधानं xliii 12 | तिस्रस्तिस्रस्तासां ix 4 तस्याः कोणेषु xlviii 37 | तिस्रो रेखा lxviii 44 तस्याः सगद्गदगिरं xxxii 5 | तिस्रो रेखाः lxviii 75 तस्यैव पश्चिमायां liv 25 | तीक्ष्णः प्रकोपः lxviii 113 ताडयेद्यदि xxiv 34 | तीक्ष्णंतपत्यदितिजः xix 2 तानवलोक्य xxiv 3 | तीव्रदिवाकरकिरणामि xxi 24 तानिदृष्ट्वा च lxxxvi 4 | तुम्बवनकार्पणेयकया xiv 15 ताम्यशुचिभाण्डकीलः liii 58 | तुरगकरिणस्तृतीये xxxix 5
18 Adhyaya Sloka | Adhyaya Sloka तुरग तुरगोपचारक कवि x 3 | त्रिविधस्तस्योच्छ्रायो xlviii 47 तुलाधरेऽवन्त्य v 40 | त्रिषुमेषादिषु xl 13 तुल्यैः lxxvii 7 | त्रिषुविपुलो lxviii 84 तुषसदृशनखाः lxviii 41 | त्रिष्वाद्यवर्षेषु viii 32 तृणैरिवाग्निः lxxv 10 | त्रीण्युत्तराणि xcviii 6 तृतीयगश्चौर civ 12 | त्रैगर्त्तपौरवाम्बष्ठपारता xvi 21 ते ग्राम्यसत्त्वैरनुवा xci 2 | त्वक् कुष्ठरेणुनलिका lxxvii 5 तेचार्कमण्डलगताः iii 8 | त्वक् शुक्रसारः lxix 14 तेजो न दधात् lxxv 7 | त्वगुशीरपत्रभागैः lxxvii 12 ते रक्तनीलपाण्डुर xxxiv 2 | त्वाष्ट्रेभूषणमणिराग xv 12 तेषां किलजायन्ते lxxxi 21 | त्वाष्ट्रेयुगेसर्वजिदाद्य viii 37 तेषामुदयेरुपाण्यम्भः iii 9 | द तेषां प्रपाण lxvi 4 | दक्षिणकुक्षिविभेदो v 84 तैः संस्तुतः सदेवस्तु xliii 5 | दक्षिणतो vi 10 तोयं श्रितं liv 113 | दक्षिणदिक्स्थः xvii 9 तोयानिपङ्ककुमुदोत्पल xix 5 | दक्षिणपार्श्वेनगतः iv 6 तोयैस्त्वामभिषिञ्चन्तु xlviii 70 | दक्षिणपार्श्वेपुरुषो lxxviii 24 तौलिनिचित्रान्त्यार्द्धं cii 4 | दक्षिणपार्श्वेमण्डल lxv 2 तौलिनितान्तवभाण्डं xlii 8 | दक्षिणभुजेनहीने liii 65 त्यजतोऽर्कतलं iv 3 | दक्षिणविरुतं xcv 29 त्यागो विवासनं xlvi 58 | दक्षिणविषाणमर्द्धोन्नत iv 10 त्रयोऽपि योगाः xxvi 12 | दक्षिणां xlvii 8 त्रस्यञ्छ्रेष्ठो राज्ञः xliv 18 | दण्डवधोदण्डाख्ये liii 41 त्रिचतुर्थसप्तमदिने xxxii 29 | दण्डार्धविस्तृतं तत् lxxiii 3 त्रित्रिद्विद्विसमाः liii 19 | दण्डीयमोमहिषगो lviii 57 त्रिदशगुरुः शयनं civ 29 | दण्डेनेरेन्द्रमृत्युर्व्याधि iii 17 त्रिपञ्चसप्तनवभिः lvi 14 | दत्त्वाऽभयं xlviii 81 त्रिभिरेव xcvii 3 | दद्याद्धुतेसमाप्तेघृतपूर्णं cv 7 त्रिंशत्तूर्य्यधिकाराहोस्ते xi 22 | दधिकुमुदशशाङ्क ix 45 त्रिंशत्सप्ततिमूल्यं lxxxi 15 | दधितण्डुललाजानां lxxxvii 14 त्रिंशद्धस्तायामोदशभौमो lvi 21
19
| Adhyaya | Sloka | Adhyaya | Sloka |
|---|---|---|---|
| दधिसदृशाग्रो xxx | 18 | दिवाप्रस्थानवद् lxxxvi | 48 |
| दन्तभङ्गफलमत्र xciv | 9 | दिविभाति xlvii | 11 |
| दन्तस्यमूलपरिधिं lxxix | 20 | दिविभुक्शुभफलानां xxxiii | 1 |
| दन्तस्यमूलपरिधिं xciv | 1 | दिव्यंग्रहक्षं xlvi | 4 |
| दन्तैर्नागागोह xxvi | 8 | दिव्यमपिशममुपैति xlvi | 6 |
| दम्पत्योर्द्दिनवाप्तराशि c | 8 | दिव्यस्त्री भूतगन्धर्वे xlvi | 90 |
| दम्पत्योर्व्युत्क्रमे lxxiv | 12 | दिव्यान्तरिक्षा xlvii | 1 |
| दंष्ट्रामूलेशशिकान्ति lxxxi | 23 | दिव्योद्धन्वनुक्तः lxxxviii | 9 |
| दर्पणेचैकदेशे v | 50 | दिशिपश्चिमोत्तरस्यां xiv | 22 |
| दर्पणवृत्ताकारा xi | 13 | दिशियाम्यायां कुर्याद्दधि lx | 1 |
| दर्शनमस्तमयो xi | 2 | दिशिशान्तायां शकुनिः liii | 107 |
| दशधैवं lxxxvi | 16 | दिशोधूमान्धकाराश्च xlvi | 93 |
| दशमगृहगते civ | 17 | दीप्तः संहत lxxxiv | 2 |
| दशरथतनयो lviii | 30 | दीप्तमृगविहङ्गरुतः xxxiv | 8 |
| दशसप्तचतुर्द्दन्यः lxi | 3 | दीप्तमृगाण्डज xxx | 5 |
| दाक्षिण्यमेकं lxxv | 5 | दीप्तविहङ्गशिवामृगघुष्टा xxx | 30 |
| दाक्षिण्ययुक्तमशठं lxx | 7 | दीप्तोद्विग्नो xcv | 18 |
| दान्तः सुखी ci | 4 | दीप्तौजसः प्रचण्डः xxxii | 15 |
| दारुणनादस्तरुकोट xcv | 17 | दीर्घग्रीवाक्षिकूटस्खिक lxvi | 1 |
| दाहोदिशां xxxi | 1 | दीर्घाङ्गुलिरक्तपुष्कराः lxvii | 8 |
| दिक्पतिसंज्ञा च liv | 4 | दीर्घासंसक्ता lxviii | 69 |
| दिग्देशचेष्टा xcvi | 1 | दीर्घोऽङ्गुलानां lxix | 21 |
| दिङ्गमण्डलेभ्यन्तर lxxxviii | 47 | दुःस्वशत्रुनिचयस्य lii | 5 |
| दिनकरकरामितापादक्ष iii | 36 | दुर्जनहुताशतप्तं cvi | 4 |
| दिनकरमुदयास्त iii | 33 | दुर्बलिकोभाण्डीकः lxxxviii | 7 |
| दिनकरमुनिगुरुचरण cvi | 6 | दुर्बलेरपिचिरब्लिव lxxxviii | 28 |
| दिनकररथमार्गविच्छित्त xii | 6 | दुर्भिक्षमनावृष्टा xlvi | 38 |
| दिनचतुष्टयमुत्थित xliii | 67 | दुष्टवाक्य civ | 19 |
| दिनान्त सन्ध्या lxxxviii | 40 | दुष्टस्वभावाः lxxviii | 16 |
| दिवसकृतः iii | 37 | दुःस्वप्नदुर्विचिन्ति ii | 21 |
| दिवसकृतः xxxvii | 3 | दूरगोनिकटगोऽथवा xxiv | 28 |