चक्रदत्त (चक्रपाणिदत्त - पदार्थचन्द्रिका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Chakradatta Hindi
महामहोपाध्याय चक्रपाणिदत्त द्वारा
स्रोत: Chakradatta Chikitsa Sangraha with Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१५४ चक्रदत्त—१०. राजयक्ष्माधिकारमु.
चिनवारिकि बृंहणदीपनमुलनु गलिगिंचु क्रियलनु चेयवलयुनु. एलयनఁगा पुरुषुलकु बलमु वीर्यमु ननुसरिंचि युंडुनु. जीवितमु मलमु ननुसरिंचि युंडुनु. ईकारणमुवलन क्षयरोगमुलकु प्रयत्नपूर्वकमुगा मलमुनु वीर्यमुनु कापाडुचुंडवलयुनु. पिप्पळ्ळु कोडिसेपाल यवलु उलवलु शोंठि दानिम्मरसमु उसिरिक वीटितोटि पक्वमुचेयఁबडिन मेकमांसपुरसमुनु त्रागिंपवलयुनु. इद्दानिचेत पीनस मोदलगु नारुविकारमुलु नशिंचुनु. रसमुनंदु द्रव्यमुलनु नीटिनि पानकमुललोवलेने सूपशास्त्रमु ननुसरिंचि प्रस्थपरिमाणजलमुनकु १२ पलमुलु चेर्चवलयुनु. गट्टिगा चेयवलसियुन्न निट्लु चेयवलयुनु. पल्चनगा चेयवलसिनचो नारुपलमुलनु मात्रमे चेर्पवलयुनु. परिशुद्धमु चेसिन रसमिलो ओक पलमंतगा मांसमुनुनूरि कलिपिमेयवलयुनु. धनियामुलु, पिप्पळ्ळु, शोंठि, दशमूलमुलु वीटियोक्क कषायमुनु त्रागवलयुनु. अश्वगंध (पेन्नेरु) तिप्पतीगे पिल्लीपीचर दशमूलमु मुत्तुवपुलगमु वृषभक मनुगंधद्रव्यमु अड्डसरमु पुष्करमूलमु अतिवस वीटियोक्क चूर्णमुनु पालनु मांसपुरसमुनु सेविंचिनयेडल क्षयरोगमुलु नशिंचि पोवुनु.
• दशमूल सललितादिप्रयोगमु. •
श्लो. दशमूल बला रास्ना पुष्करसुरदारु नागरैः क्वथितम्, पेयं पार्श्वांसशिरोरुक् क्षयकासादि शान्तये सलिलम्. १०.
ककुभत्वङ्नागबला वानरबीजानि चूर्णितं पयसि, पक्वं घृतमधुयुक्तं ससितं यक्ष्मादिकासापहम्. ११.
पारावत कपिञ्जल कुरङ्गाणां पृथक्पृथक्, मांसचूर्णं मदाक्षीरं (अजाक्षीरं) पीतं यक्ष्महरं परं. १२.
घृतकुसुमसारलीढं क्षयं क्षयं नयति गजबलामूलं, दुग्धेन केवलेन तु वायसजङ्घानि पीतैर्वा. १३.
कृष्णाद्राक्षासितालेहः क्षयहृत् क्षौद्रतैलवान्, मधुसर्पिर्युतो वाऽश्वगन्धा कृष्णासितोद्भवाः. १४.
शर्करा मधुसंयुक्तं सवसितं लिहन् क्षयी, क्षीराशी लभते पुष्टि मश्नुते चास्यचायिके. १५.
दशमूलमुलु मुत्तुवपुलगमु सन्नरास्न पुष्करमूलमु देवदारु शोंठि वीटि नन्निंटिनि कषायमुनु काचि त्रागवलयुनु. इय्यदि पार्श्वपुनोप्पि तलनोप्पि क्षय दग्गु मोदलगुवानिनि शांति पोंदिंचुनु. मद्दिपट्ट जीर नागबल दूलगोंडिवित्तुलु. वीटिनि चूर्णमु चेसि पाललो चक्कఁगा काचि, नेय्यि तेने