भारतकोश
चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

Chanakya Niti Darpan Hindi

आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा

स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished132 पृष्ठ

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८ चाणक्यनीतिदर्पणः

क्योंकि विवाह अपने समान कुल में ही अच्छा होता है ॥१४॥

नदीनां शस्त्रपाणीनां नखीनां शृङ्गिणां तथा । विश्वासो नैव कर्तव्यः स्त्रीषुराजकुलेषु च ॥१५॥

दोहा—सरिता शृङ्गी शस्त्र अरु, जिव जितने नखवन्त । तियको नृपकुलको तथा, करहिं विश्वास न सन्त ॥१५॥

नदियों का, शस्त्रधारियों का, बड़े-बड़े नखवाले जन्तुओं का, सींगवालों का, स्त्रियों का और राजकुल के लोगों का विश्वास नहीं करना चाहिये ॥ १५ ॥

विषादप्यमृतं ग्राह्यममेध्यादपि काञ्चनम् । नीचादप्युत्तमां विद्यां स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि ॥१६॥

दोहा—गहु सुधा विषते कनक, मलते बहुकरि यत्न । नी... विद्या विमल, दुष्कुलते तियरत्न ॥१६॥

विष से भी अमृत, अपवित्र स्थान से भी कञ्चन, नीच मनुष्य से भी उत्तम विद्या और दुष्कुल से भी स्त्रीरत्न को ले लेना चाहिए ॥ १६ ॥

स्त्रीणां द्विगुण आहारो लज्जा चापि चतुर्गुणा । साहसं षड्गुणं चैव कामश्चाष्टगुणः स्मृतः ॥१७॥

दोहा—तिय अहार देखिय द्विगुण, लाज चतुरगुन जान । षटगुन तेहि व्यवसाय तिय, काम अष्टगुन मान ॥१७॥

स्त्रियों में पुरुषकी अपेक्षा दूना आहार चौगुनी लज्जा छगुना