भारतकोश
चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

Chanakya Niti Darpan Hindi

आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा

स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished132 पृष्ठ

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१०६ . चाणक्यनीतिदर्पणः

उसे बदबूदार मुर्दे के रूप में देखते हैं कामी उसे कामिनी समझता है और कुत्ता उसे मांसपिण्ड जानता है ॥१५॥

सुसिद्धमौषधं धर्मं गृहच्छिद्रं च मैथुनम् ।
कुभुक्तं कुश्रुतं चैव मतिमान्न प्रकाशयेत् ॥१६॥

सो०--सिद्धौषध धौ धर्म, मैथुन कुवचन भोजनो ।
अपने घरको मर्म, चतुर नहीं प्रगठित करै ॥१६॥

बुद्धिमान् को चाहिए कि इन बातों को किसी से न जाहिर करे—अच्छी तरह तैयार की हुई औषधि, धर्म, अपने घर का दोष, दूषित भोजन और निंद्य किं वदन्ती बचन ॥१६॥

तावन्मौनेन नीयन्ते कोकिलैश्चैव वासराः ।
यावत्सर्वजनानन्ददायिनी वाक् प्रवर्तते ॥१७॥

सो०- तौलौं मौने ठानि, कोकिलहू दिन काटते ।
जौलौं आनन्द खानि, सब को वाणी होत है ॥१७॥

कोयलें तब तक चुपचाप दिन बिता देती हैं जबतक कि वे सब लोगों के मनको आनन्दित करनेवाली वाणी नहीं बोलती हैं। १७।

धर्मं धनं च धान्यं च गुरोर्वचनमौषधम् ।
सुगृहीतं च कर्त्तव्यमन्यथा तु न जीवति ॥१८॥

सो०--धर्म धान्य धनज्ञानि, गुरु वच औषध पाँच यह ।
धार रक्षण अरु हित जानि, अन्यथा जीवन नाहिं यह ॥१८॥

धर्म, धन, अन्न, गुरु का वचन और औषधि इन वस्तुओं को सावधानी के साथ अपनावे और उनके अनुसार चले । जो ऐसा नहीं करता, वह नहीं जीता है ॥१८॥