चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचाणक्यनीतिदर्पणः १३
जो माता अपने बेटे को पढ़ाती नहीं, वह शत्रु है । उसी तरह पुत्र को न पढ़ानेवाला पिता पुत्र का बैरी है । क्योंकि (इस तरह माता-पिता की ना समझी से वह पुत्र) सभा में उसी तरह शोभित नहीं होता, जैसे हंसों के बीच में बगुला ॥११॥
लालनाद् बहवो दोषास्ताडनात् बहवो गुणाः ।
तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्नतुलालयेत् ॥१२॥
दोहा—सुत लालन में दोष बहु, गुण ताड़न ही माहिं ।
तेहि ते सुत अरु शिष्य कूँ, ताड़िय लालिय नाहिं॥१२॥
बच्चों का दुलार करने में दोष है और ताड़न करने में बहुत से गुण हैं । इसलिए पुत्र और शिष्य को ताड़ना अधिक दे, दुलार न करे ॥१२॥
श्लोकेन वा तदर्द्धेन तदर्द्धाऽर्द्धाक्षरेण वा ।
अवन्ध्यं दिवस कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ॥१३॥
दोहा—सीखत श्लोकहु अरध कै, पावहु अक्षर कोय ।
वृथा गमावत दिवस ना, शुभ चाहत निज सोय ॥१३॥
किसी एक श्लोक या उसके आधे-आधे भाग या आधे के भी आधे भाग का मनन करे । क्योंकि भारतीय महर्षियों का कहना यही है कि जैसे भी हो दान, अध्ययन ( स्वाध्याय ) आदि सब कर्म करके बीतते हुए दिनों को सार्थक करो, इन्हें यों ही न गुजर न जाने दो ॥१३॥