चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंउसी तरह वनके एक ही सूखे और अग्नि से जलते हुए वृक्ष के कारण सारा वन जल कर खाक हो जाता है जैसे किसी कुपूत के कारण खानदान का खानदान बदनाम हो जाता है ॥१५॥
एकेनापि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना ।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी ॥१६॥
सोरठा--एकहु सुत जो होय, विद्यायुत अरु साधु चित ।
आनन्दित कुल सोय, यथा चन्द्रमा से निशा ॥१६॥
एक ही सज्जन और विद्वान् पुत्र से सारा कुल आह्लादित हो उठता है जैसे चन्द्रमाके प्रकाशसे रात्रि जगमगा उठती है ॥१६॥
किं जातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसन्तापकारकैः ।
वरमेकः कुलालम्बी यत्र विश्राम्यते कुलम् ॥१७॥
दोहा--करनहार सन्ताप सुत, जनमै कहा अनेक ।
देहि कुलहिं विश्राम जाँ, श्रेष्ठ होय वरु एक ॥१७॥
शोक और सन्ताप देनेवाले बहुत से पुत्रों के होने से क्या लाभ ? अपने कुल के अनुसार चलनेवाला एक ही पुत्र बहुत है कि जहाँ सारा कुल विश्राम कर सके ॥१७॥
लालयेत्पञ्चवर्षाणि दश वर्षाणि ताडयेत् ।
प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत् ॥१८॥