चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचाणक्यनीतिदर्पणः २३
दोहा--पाँच वर्ष लौं लालिए, दसलोँ ताड़न देइ । सुतहीँ सोलह वर्ष में, मित्र सरिस गनि लेइ ॥१८॥ पाँच वर्ष तक बच्चे का दुलार करे। फिर दस वर्ष तक उसे ताड़ना दे, किन्तु सोलह वर्ष के हो जाने पर पुत्र को मित्र के समान समझे ॥१८॥
उपसर्गेऽन्यचक्रे च दुर्भिक्षे च भयावहे । असाधुजनसम्पर्के यः पलायति स जीवति ॥१९॥
दोहा--काल उपद्रव संग सठ, अन्य राज्य भय होय । तेहि थल ते जो भागिहै, जीवन बच्छिहै सोय ॥१९॥ दंगा वगैरह खड़ा हो जाने पर, किसी दूसरे राजा के आक्रमण करने पर, भयानक अकाल पड़ने पर और किसी दुष्ट का साथ हो जाने पर, जो मनुष्य भाग निकलता है, वही जीवित रहता है ॥१९॥
धर्मार्थकाममोक्षेषु यस्यैकोऽपि न विद्यते । जन्मजन्मनि मर्त्येषु मरणं तस्य केवलम् ॥२०॥
दोहा--धरमादिक चहुँ वरन में, जो हिय एक न धार । जगत जननि तेहि नरन के, मरिये होत अवार ॥२०॥ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चार पदार्थों में से एक पदार्थ भी जिसको सिद्ध नहीं हो सका, ऐसे मनुष्य का मर्त्य-लोक में बार-बार जन्म केवल मरने के लिए होता है। और किसी काम के लिए नहीं ॥२०॥