चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४ चाणक्यनीतिदर्पणः
मूर्खा यन्त्र न पूज्यन्तो धान्यं यत्र सुसञ्चितम् । दाम्पत्ये कलहो नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ॥२१॥ दोहा--जहाँ अन्न संचित रहे, मूर्ख न पूजा पाव । दंपति में जहँ कलह नहिं, संपति आपुइ आव ॥२१॥ जिस देश में मूर्खों की पूजा नहीं होती, जहाँ भरपूर अन्न का संचय रहता है और जहाँ स्त्री पुरुष में कलह नहीं होता, वहाँ बस यही समझ लो कि लक्ष्मी स्वयं आकर विराज रही हैं ॥२१॥
इति चाणक्ये तृतीयोऽध्यायः ॥३॥ —:०:—
अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ ४ ॥
आयुः कर्म च वित्तञ्च विद्या निधनमेव च । पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥१॥ सोरठा--आयुर्बल औ कर्म, धन विद्या अरु मरण ये । नीति कहत अस मर्म, गर्भहि में लिखि जात ये ॥१॥ आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पाँच बातें तभी लिख दी जाती हैं, जब कि मनुष्य गर्भ में ही रहता है ॥१॥
साधुभ्यस्ते निवर्तन्ते पुत्रमित्राणि बान्धवाः । ये च तैः सह गन्तारस्तद्धर्मात्सुकृतं कुलम् ॥२॥