चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२८ चाणक्यनीतिदर्पणः
सांसारिक ताप से जलते हुए लोगों के तीन ही विश्राम स्थल हैं। पुत्र, स्त्री और सज्जनों का संग ॥१०॥
सकृज्जल्पन्ति राजानः सकृज्जल्पन्ति पण्डिताः । सकृत्कन्याः प्रदीयन्ते त्रीण्येतानि सकृत्सकृत् ॥११॥
दोहा—भूपति औ पण्डित बचन, औ कन्या को दान ।
एकै एकै बार ये, तीनों होत समान ॥११॥
राजा लोग केवल एक बार कहते हैं, उसी प्रकार पण्डित लोग भी केवल एक ही बार कहते हैं, (आर्यधर्मावलम्बियों के यहाँ) केवल एक ही बार कन्या दी जाती है, ये तीन बातें केवल एक ही बार होती हैं ॥११॥
एकाकिना तपो द्वाभ्यां पठनं गायनं त्रिभिः ।
चतुर्भिर्गमनं क्षेत्रं पंचभिर्बहुभी रणम् ॥१२॥
दोहा—तप एकहि द्वैसे पठन, गान तीन मग चारि ।
कृषी पाँच रन बहुत मिलु, अस कह शास्त्र विचारि ॥१२॥
अकेले में तपस्या, दो आदमियों से पठन, तीन गायन, चार आदमियों से रास्ता, पाँच आदमियों के संघ से खेती का काम और ज्यादा मनुष्यों के समुदाय द्वारा युद्ध सम्पन्न होता है ॥ १२ ॥
सा भार्या या शुचिर्दक्षा सा भार्या या पतिव्रता ।
सा भार्या या पतिप्रीता सा भार्या सत्यवादिनी ।१३।