चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचाणक्यनीतिदर्पणः २९
दोहा—सत्य मधुर भाखे वचन, और चतुरशुचि होय ।
पति प्यारी और पतिव्रता, त्रिया जानिये सोय ॥१३॥
वही भार्या ( स्त्री ) भार्या है, जो पवित्र, काम-काज करने में निपुण, पतिव्रता, पतिपरायण और सच्ची बात करने वाली हो ॥ १३ ॥
अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यास्त्वबांधवाः ।
मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्या दरिद्रता ॥ १४ ॥
दोहा—है अपुत्र का सून घर, बान्धव बिन दिशि सून ।
मूरख का हिय सून है, दारिद का सब सून ॥१४॥
जिसके पुत्र नहीं है, उसका घर सूना है । जिसका कोई भाई-बन्धु नहीं होता, उसके लिए दिशाएँ शून्य रहती हैं । मूर्ख मनुष्य का हृदय शून्य रहता है और दरिद्र मनुष्य के लिए सारा संसार सूना रहता है ॥ १४ ॥
अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम् ।
दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम् ॥ १५ ॥
दोहा—भोजन विष है बिन पचे, शास्त्र बिना अभ्यास ।
सभा गरल सम रंकहीं, वृद्धहिं तरुनी पास ॥१५॥
अनभ्यस्त शास्त्र विष के समान रहता है, अजीर्ण अवस्था में फिर से भोजन करना विष है । दरिद्र के लिए सभा विष है और बूढ़े पुरुष के लिए युवती स्त्री विष है ॥ १५ ॥