भारतकोश
चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

Chanakya Niti Darpan Hindi

आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा

स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished132 पृष्ठ

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चाणक्यनीतिदर्पणः ४१

साफ होता है, रजोधर्म से स्त्री शुद्ध होती है और वेग से नदी शुद्ध होती ॥ ३ ॥

भ्रमन्संपूज्यते राजा भ्रमन्संपूज्यते द्विजः ।
भ्रमन्संपूज्यते योगी स्त्री भ्रमन्ती विनश्यति ॥४॥
दोहा–पूजे जाते भ्रमण से, द्विज योगी अरु भूप ।
भ्रमण किये नारी नशे, ऐसी नीति अनूप ॥४॥
भ्रमण करनेवाला राजा पूजा जाता है, भ्रमण करता हुआ ब्राह्मण भी पूजा जाता है और भ्रमण करता हुआ योगी पूजा जाता है, किन्तु स्त्री भ्रमण करने से नष्ट हो जाती ॥४॥

यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्थास्तस्य बान्धवाः ।
यस्यार्थाः स पुमांल्लोके यस्यार्थाः स च पण्डितः॥५॥
दोहा–मित्र और हैं बन्धु तेहि, सोइ पूरुष गण जात ।
धन है जाके पास में, पण्डित सोइ कहात ॥५॥
जिसके पास धन है उसके बहुत से मित्र हैं, जिसके पास धन है उसके बहुत से बान्धव हैं। जिसके पास धन है वही संसार का श्रेष्ठ पुरुष है और जिसके पास धन है वही पण्डित है ॥५॥

यादृशी जायते बुद्धिर्व्यवसायोऽपि तादृशः ।
सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता ॥६॥
दोहा–जैसोई मति होत है, तैसोइ व्यवसाय ।
होनहर जसी रहै, तैसोई मिलत सहाय ॥ ६ ॥