भारतकोश
चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

Chanakya Niti Darpan Hindi

आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा

स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished132 पृष्ठ

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५० चाणक्यनीतिदर्पणः

हजार हाथ की दूरी से हाथी से, सौ हाथ की दूरी से घोड़े से, दस हाथ की दूरी से सींगवाले जानवरों से बचना चाहिये और मौका पड़ जाय तो देश को ही त्याग कर दुर्जन से बचे ॥७॥

हस्ती अंकुशमात्रेण बाजी हस्तेन ताड्यते ।
शृङ्गी लकुटहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः ॥८॥

दोहा--हस्ती अंकुश तैं हनिय, हाथ से पकरि तुरंग ।
शृङ्गि पशुन को लकुटतैं, असितैं दुर्जन भंग ॥८॥

हाथी अंकुश से, घोड़ा चाबुक से, सींगवाले जानवर लाठी से और दुर्जन तलवार से ठीक होते हैं ॥८॥

तुष्यन्ति भोजने विप्रा मयूरा घनगर्जिते ।
साधवः परसम्पत्तौ खलाः परविपत्तिषु ॥६॥

दोहा--तुष्ट होत भोजन किये, ब्राह्मण लखि घन घोर ।
पर सम्पति लखि साधु जन, खल लखि पर दुःख घोर॥९।

ब्राह्मण भोजन से, मोर मेघ के गर्जन से, सज्जन पराये धन से और खल मनुष्य दूसरे पर आई विपत्ति से प्रसन्न होता है॥९॥

अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम् ।
आत्मतुल्यबलं शत्रुः विनयेन बलेन वा ॥१०॥

दोहा---बलवंतहिं अनुकूलहीं, प्रतिकूलहिं बलहीन ।
आतम बल सम शत्रुको, विनय बसहिं वश कीन ॥१०॥

अपने से प्रवल शत्रु को उसके अनुकूल चल कर, दुष्ट शत्रु को उसके प्रतिकूल चल कर और समान बलवाले शत्रु को विनय और बल से नीचा दिखाना चाहिए ॥१०॥