चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचाणक्यनीतिदर्पणः ५३
संसार में आने पर स्वर्ग स्थानियों के शरीर में चार चिह्न रहते हैं, दान का स्वभाव, मीठा वचन, देवता की पूजा, ब्राह्मण को तृप्त करना अर्थात् जिन लोगों में दान आदि लक्षण रहे उनको जानना चाहिये कि वे अपने पुण्य के प्रभाव से स्वर्ग वासी मृत्यु लोक में अवतार लिये हैं ॥१६॥
अत्यन्तकोपः कटुता च वाणी
दरिद्रता च स्वजनेषु वैरम् ।
नीचप्रसङ्ग कुलहीनसेवा
चिह्नानि देहे नरकस्थितानाम् ॥१७॥
दोहा--अतिहि कोप कटु वचनहूँ, दारिद नीच मिलान ।
स्वजन वैर अकुलिन टहल, यह षट नर्क निशान ॥१७॥
अत्यन्त क्रोध, कटुवचन, दरिद्रता, अपने जनोंमें वैर, नीचका संग, कुलहीनकी सेवा, ये चिह्न नरकवासियोंकी देहोंमें रहते हैं।१७।
गम्यते यदि मृगेन्द्रमन्दिरं
लभ्यते करिकपोलमौक्तिकम् ।
जम्बुकालयगते च प्राप्यते ।
वत्सपुच्छखरचर्मखण्डनम् ॥ १८ ॥
दोहा--सिंह भवन यदि जाय कोउ, गजमुक्ता तहँ पाय ।
वत्सपूँछ खर चर्म डुक, स्यार माँद हो जाय ॥१८॥
यदि कोई सिंह की गुफा में जा पड़े तो उसको हाथी के कपोलका मोती मिलता है और सियारके स्थानमें जाने पर बछवे की पूँछ और गदहे के चमड़े का टुकड़ा मिलता है ॥१८॥